Thiruvananthapuram : राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में मचे बवाल के बीच राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। इस गंभीर मुद्दे पर अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला है। थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि अगर आप ऐसी प्रक्रिया चलाते हैं, जहां परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भरोसा ही न किया जा सके, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शशि थरूर ने केंद्र सरकार से पुरजोर अपील की है कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ दोबारा कभी नहीं होना चाहिए।
‘लोग बहुत ठगा हुआ और निराश महसूस करते हैं’
परीक्षार्थियों के दर्द को साझा करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “दुर्भाग्य से, अपनी तैयारी में दिन-रात इतनी कड़ी मेहनत करने वाले छात्र अचानक पाते हैं कि पेपर लीक हो रहा है, चारों तरफ भ्रष्टाचार है, बेईमानी है और पूरी प्रक्रिया दूषित हो चुकी है। कभी-कभी तो ऐसी स्थिति में परीक्षाएं रद्द तक हो जाती हैं और उन्हें फिर से परीक्षा देनी पड़ती है। जब देश के युवा और लोग ऐसा माहौल देखते हैं, तो वे खुद को बहुत ठगा हुआ और निराश महसूस करते हैं।”
“दुनिया में और भी परीक्षाएं हैं, सिर्फ हमारी सरकार की परीक्षाएं ही क्यों गड़बड़ होती हैं?”
शशि थरूर ने परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि दुनिया में कई प्रतियोगी परीक्षाएं हैं जो पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से आयोजित की जाती हैं, चाहे वह SAT हो, कैंब्रिज परीक्षा हो या फिर ISC या कोई और। उन्होंने सरकार को घेरते हुए सवाल किया, “ऐसा क्यों है कि केवल हमारी सरकार द्वारा संचालित परीक्षाएं ही लगातार गड़बड़ हो रही हैं? सरकार आज ऐसी स्थिति में क्यों आ खड़ी हुई है कि वह राष्ट्रीय परीक्षा जैसी एक सरल और बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया की निष्पक्षता और निष्ठा की गारंटी तक नहीं दे पा रही है?”
यह पहली बार नहीं है, लेकिन यह आखिरी बार होना चाहिए
सांसद थरूर ने कहा कि मेरा स्पष्ट मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की इस पूरे मामले में शत-प्रतिशत जिम्मेदारी है। यह पहली बार नहीं है जब कोई राष्ट्रीय स्तर का पेपर लीक हुआ है, लेकिन देश के हित में यह आखिरी बार होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “यह वास्तव में पूरी तरह से सरकार की नाकामी है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। समस्या को तुरंत ठीक करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। अन्यथा, यह देश की एक पूरी पीढ़ी के साथ विश्वासघात है। इसके लिए सरकार, संबंधित मंत्रालय और NTA, सभी जिम्मेदार हैं, क्योंकि दुनिया के हर दूसरे देश में परीक्षाएं बिना किसी विवाद के होती हैं, लेकिन भारत में यह बेशर्मी भरी लीक और अक्षमता के साथ बार-बार दोहराया जा रहा है।”

