March 19, 2026

कमजोर हो चुका ईरान युद्ध लंबा क्यों खींच रहा?

Delhi/Alive News: ईरान इस समय अब तक के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है। इसके बावजूद वह अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष को लंबा खींचने में लगा हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। उसके कई बड़े नेता और सैन्य कमांड ढांचे के अहम लोग मारे गए हैं। इससे उसकी नेतृत्व व्यवस्था को गंभीर झटका लगा है।

ईरान के अंदर भी हालात अच्छे नहीं हैं। लोगों को जरूरी सामान की कमी, बुनियादी ढांचे के नुकसान और सख्त सुरक्षा माहौल झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद ईरान की बची हुई लीडरशिप लगातार आक्रामक बयान दे रही है।

वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान लंबे समय तक संघर्ष झेल सकता है। उन्हें और नेताओं के मारे जाने की परवाह नहीं है और वे इस युद्ध को लंबा खींचने के लिए तैयार हैं, चाहे इसका असर पूरे क्षेत्र और दुनिया पर क्यों न पड़े।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान का मकसद इस युद्ध में जीत हासिल करना नहीं है। उसका असली मकसद है अपने अस्तित्व को बचाना, दुश्मनों को डराना और ऐसी स्थिति बनाना जिसमें वह युद्ध के बाद की शर्तें तय कर सके। वह संघर्ष बढ़ा रहा है ताकि बाकी देशों के लिए इसे जारी रखना बहुत महंगा हो जाए और वे समझौता करने पर मजबूर हो जाएं।

जंग खत्म करने के लिए हर्जाना चाहता है ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान से सरेंडर करने को कहा है, लेकिन ईरान खुद को मजबूत स्थिति में दिखा रहा है। वह कह रहा है कि वह इस संघर्ष में टिके रहने में सफल रहा है और अब शांति के लिए अपनी शर्तें रख रहा है।

ईरान चाहता है कि युद्ध खत्म होने के बाद क्षेत्र में नई व्यवस्था बनाई जाए। वह युद्ध के नुकसान की भरपाई (मुआवजा) भी मांग रहा है और खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों में बदलाव चाहता है।

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि युद्धविराम तभी संभव है, जब यह सुनिश्चित हो जाए कि दुश्मन दोबारा हमला नहीं करेगा। उनका कहना है कि अगर युद्धविराम से दुश्मन को अपनी ताकत फिर से तैयार करने का मौका मिलता है, जैसे रडार ठीक करना या मिसाइल सिस्टम मजबूत करना तो ऐसा युद्धविराम बेकार है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान तब तक लड़ाई जारी रखेगा, जब तक दुश्मन अपने हमले पर पछतावा न करे और दुनिया और क्षेत्र में सही राजनीतिक और सुरक्षा हालात न बन जाएं।

ईरानी विदेश मंत्री बोले- होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम बने

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम बनाया जाना चाहिए, जिसमें ईरान के हितों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही कुछ खास शर्तों के तहत ही होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान आगे चलकर अपने विदेशों में फंसे पैसे को छुड़ाने की मांग कर सकता है या इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने वाले देशों से टैक्स भी ले सकता है। गालिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रहेगी।

अब ‘युद्ध के बाद क्या होगा’ इस सवाल पर भी दबाव बढ़ रहा है। दो दशकों तक पश्चिमी देशों और ईरान के बीच बातचीत चलती रही, लेकिन पिछले महीने अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। इस हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई और देश की सैन्य व प्रशासनिक व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा।

इसके जवाब में ईरान ने तेज और लगातार हमले किए। उसने पूरे क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। इससे खाड़ी देशों के साथ उसके रिश्ते और खराब हो गए और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी असर पड़ा। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के कारण।

कमजोर हो चुका ईरान युद्ध लंबा क्यों खींच रहा