Faridabad/Alive News: फरीदाबाद में रहने वाले लोगों को जिस जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं उन्हें उसी से वंचित रखा जा रहा है फरीदाबाद का एक्यूआई 167 बताया गया है जो मध्यम श्रेणी में गिना जाता है हालांकि स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता प्रशासनिक आंकड़ों पर सवाल उठा रहे। क्योंकि शहर की ज्यादातर हिस्से में हवा की स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर महसूस की जा रही है जिले में प्रदूषण नियंत्रण में फेल साबित हो रहा है। फरीदाबाद में प्रदूषण मापने के लिए चार स्थायी एयर क्वालिटी स्टेशन स्थिति है लेकिन इन में से फिलहाल केवल एक ही सक्रिय है बाकी तीन तकनीकी खराबी के अभाव में बंद पड़े हैं। ऐसे में शहर की वास्तविक वायु गुणवत्ता का पता लगाना मुश्किल हो गया है स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय धुंध, धुआं और बदबू से हालात बेहद खराब रहती हैं।
फरीदाबाद में प्रदूषण का स्तर लगातार 198 पर बना हुआ है। यह स्थिति तब है जब बल्लभगढ़ में एक्यूआई 300 के पार है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, सोमवार को भी यह 198 दर्ज किया गया। यह विसंगति चिंता का विषय है। आमतौर पर, जब मौसम खराब होता है और स्मॉग होता है, तो प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। लेकिन फरीदाबाद में ऐसा नहीं हो रहा है। बल्लभगढ़ जैसे पड़ोसी इलाके में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा है, जो 300 से ऊपर है। यह आंकड़ा पिछले कई दिनों से लगभग एक जैसा ही बना हुआ है। यह समझना मुश्किल हो रहा है कि खराब मौसम के बावजूद फरीदाबाद की हवा की गुणवत्ता में सुधार क्यों नहीं दिख रहा है।
फरीदाबाद में सोमवार को हवा की गुणवत्ता छह गुना खराब हो गई। बल्लभगढ़ का एक्यूआई 319 और एनआईटी का 230 दर्ज किया गया। इस स्मॉग के कारण एलर्जी के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। सुबह से वातावरण में स्मॉग की चादर छाई हुई थी। दृश्यता एक किलोमीटर से भी कम रही। बल्लभगढ़ का एक्यूआई 319 दर्ज किया गया। वहीं एनआईटी में भी प्रदूषण स्तर 230 दर्ज किया गया। इन दोनों इलाकों की हवा फिर दमघोंटू हो गई। प्रदूषण बढ़ने से लोगों में एलर्जी की परेशानी बढ़ गई। अस्पतालों में एलर्जी के मरीजों की संख्या अधिक होने लगी है। स्मार्ट सिटी में सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए थे और हवा पूरी तरह रुकी हुई थी। इसके चलते प्रदूषण के धुएं के कणों को ऊपर जाने का मौका नहीं मिल पाया।
लोगो को प्रदूषण से बचने के लिए
स्मॉग की वजह से एलर्जी के नए मरीजों की सामने आने लगे हैं। इनमें छींक के अलावा जुकाम, खांसी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत बढ़ गई है। प्रतिदिन अकेले बीके अस्पताल की ओपीडी में 30 से 35 एलर्जी के नए मरीज पहुंच रहे हैं। उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के अलावा मास्क और रात में सोने से पूर्व गर्म पानी की भाप लेने की भी सलाह दी जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण रहने के कम से कम बाहर जाने की भी सलाह दी गई।

