Faridabad/Alive News: यमुना में आई बाढ़ से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार ने इस पर चिंता जताते हुए आर्थिक राहत देने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल शुरू किया है। नियमों के अनुसार किसानों को किसी भी आपदा से हुए नुकसान की जानकारी घटना के 72 घंटे के अंदर पोर्टल पर अपलोड करनी होती है।
हालांकि किसानों को इसमें दिक्कत आ रही है क्योंकि पोर्टल पर फरीदाबाद का कॉलम ही दिखाई नहीं दे रहा। अपलोड की गई जानकारी के बाद नुकसान की रिपोर्ट को सत्यापन के लिए राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों के पास भेजा जाता है। सत्यापन के बाद ही मुआवजा तय होता है।
किसानों का कहना है कि 2023 में पहले भी इस ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल प्रक्रिया के बाद उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला था। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व राजस्व मंत्री दुष्यंत चौटाला ने घोषणा की थी कि फसलों के साथ-साथ बोरवेल, ट्यूबवेल कोठरों और मकानों के नुकसान का भी मुआवजा मिलेगा, लेकिन किसानों को राहत सीमित ही मिली थी।
छह हजार एकड़ फसल बर्बाद
इस बार की बाढ़ से करीब 6 हजार एकड़ क्षेत्र की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। इनमें बेलों वाली सब्जियां – घीया, तोरई, पेठा, खीरा, परमल, बैंगन, हरी मिर्च के साथ-साथ धान, बाजरा और हरा चारा (ज्वार) शामिल हैं।
सरकार की अपील
वर्तमान राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने किसानों से अपील की है कि वे अपना नुकसान पोर्टल पर दर्ज कराएं ताकि उन्हें समय पर राहत राशि उपलब्ध कराई जा सके।

