June 6, 2026

​’अंधेरे की ताकतों पर जीत’: नेतन्याहू ने अमेरिकी पायलटों के साहसी रेस्क्यू पर राष्ट्रपति ट्रंप को दी बधाई; ईरान के खिलाफ सैन्य सहयोग को बताया अभूतपूर्व

New Delhi/Alive News: ईरान की धरती पर अमेरिकी पायलटों के साहसी रेस्क्यू के बाद इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए इसे “अंधेरे की ताकतों पर जीत” करार दिया है। नेतन्याहू ने कहा कि यह ऑपरेशन साबित करता है कि जब स्वतंत्र समाज साहस और संकल्प दिखाता है, तो वह सबसे कठिन बाधाओं को भी पार कर सकता है।bनेतन्याहू ने इस मिशन को “पूरी तरह से सफल और साहसी मिशन” बताया।

इज़रायल के प्रधानमंत्री ने कहा, “पूरा इज़रायल अमेरिका के निडर योद्धाओं द्वारा एक बहादुर अमेरिकी पायलट के अविश्वसनीय रेस्क्यू पर खुश है”। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह मिशन ‘किसी को पीछे न छोड़ने’ के उस साझा पवित्र मूल्य को पुख्ता करता है, जिसका इज़रायल और अमेरिका दोनों लंबे समय से पालन करते आए हैं। साथ ही नेतन्याहू ने ट्रंप के “निर्णायक नेतृत्व” को सलाम किया और कहा कि उनके इस साहसी फैसले ने अमेरिका को एक और बड़ी जीत दिलाई है।नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस ऑपरेशन में इज़रायल द्वारा दी गई मदद के लिए आभार व्यक्त किया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के पुख्ता तथ्य
यह ऑपरेशन अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह में ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में चलाया गया था। ईरान द्वारा एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराए जाने के बाद दो चालक दल के सदस्य दुश्मन की सीमा में फंस गए थे।

अमेरिकी विशेष बलों और CIA ने एक जटिल “डिसेप्शन कैंपेन” के ज़रिए ईरानी सुरक्षा बलों को गुमराह किया और पायलटों को सुरक्षित निकाला। मिशन के दौरान अमेरिका को भी भारी नुकसान हुआ, जिसमें कई हेलीकॉप्टर और विमान क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन किसी भी अमेरिकी सैनिक को बंदी नहीं बनाया जा सका।

नेतन्याहू ने इस जीत को “आतंक की ताकतों पर विजय” बताते हुए अमेरिका के साथ इज़रायल के अभूतपूर्व सैन्य सहयोग पर गर्व जताया है।

28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस भीषण युद्ध को आज 6 अप्रैल 2026 तक 37 दिन पूरे हो चुके हैं।

अमेरिका और इज़रायल ने ईरान की सैन्य शक्ति को कुचलने के लिए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत विनाशकारी हमले किए हैं, वहीं ईरान ने भी मिसाइलों और ड्रोनों से जवाबी कार्रवाई की है।

अमेरिका-इज़रायल के दावों के अनुसार ईरान के बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को भारी चोट पहुँचाई है। लगभग 6 हजार से ज्यादा ईरानी सैनिक मारे गए हैं और 15 हजार से अधिक घायल हुए हैं।

इज़रायल का दावा है कि उसने ईरान की 70 प्रतिशत स्टील उत्पादन क्षमता को नष्ट कर दिया है। हालिया हमलों में ईरान के सबसे बड़े महशहर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ईरान के 190 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और लगभग 100 नौ सैनिक जहाज नष्ट किए जा चुके हैं। बुशहर परमाणु केंद्र के पास भी हवाई हमले हुए हैं, जिससे वहां की सहायक इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

ईरान और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने भी पलटवार करते हुए इज़रायल के शहरों और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार कर पलटवार किया है। कम से कम 15 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 520 से अधिक घायल हुए हैं।

ईरान ने एक F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया (जिसके पायलटों का रेस्क्यू हुआ)। इसके अलावा एक A-10 थंडरबोल्ट II, एक F-35 और 17 MQ-9 रीपर ड्रोन के नुकसान की खबरें हैं।

मध्य पूर्व में कम से कम 17 अमेरिकी ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे लगभग 800 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।

युद्ध में अब तक 12 सैनिक और 23 नागरिक मारे गए हैं। करीब 7 हजार लोग घायल हुए हैं। ईरान की मिसाइल ने हाल ही में हाइफा में एक 7 मंजिला आवासीय इमारत पर सीधा प्रहार किया, जिसमें कई लोग मलबे में दब गए
ईरान ने कुवैत, बहरीन और यूएई में तेल और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आया है।