June 6, 2026

इलाज के नाम पर भारी मुनाफाखोरी पर हाईकोर्ट सख्त, निजी अस्पतालों को लेकर उठाए गंभीर सवाल

Chandigarh/Alive News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों द्वारा इलाज के नाम पर की जा रही भारी मुनाफाखोरी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा सरकार से पूछा है कि क्या अस्पताल सेवा के केंद्र हैं या मुनाफा कमाने की दुकान बन गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मरीज कोई सामान (कमोडिटी) नहीं हैं और उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निजी अस्पतालों द्वारा दवाओं और मेडिकल सामान पर 350% से लेकर 1700% तक मुनाफा वसूलने पर नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान सामने आई रिपोर्ट में बताया गया कि कई अस्पताल पट्टी, सुई, ग्लव्स और दवाओं पर बहुत ज्यादा दाम वसूल रहे हैं। यह भी आरोप है कि अस्पताल दवा कंपनियों पर ज्यादा एमआरपी छापने का दबाव डालते हैं, ताकि उन्हें ज्यादा मुनाफा मिल सके। साथ ही मरीजों को बाहर से सस्ती दवाएं खरीदने की बजाय अस्पताल की ही फार्मेसी से महंगी दवाएं लेने के लिए मजबूर किया जाता है।

याचिकाकर्ता डॉ. संदीप कुमार गुप्ता ने इसे गलत व्यापारिक तरीका बताते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि 2018 में आई रिपोर्ट पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और पूछा है कि इस समस्या को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी। कोर्ट ने साफ कहा कि इलाज के नाम पर इस तरह की मुनाफाखोरी स्वीकार नहीं की जा सकती।