New Delhi/Alive News: केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन (सीटों का नया बंटवारा) जैसे बड़े बदलाव करने का प्रस्ताव है।
सरकार ने लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्लान बनाया है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इन सीटों में से 33% यानी करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में इसको लेकर संविधान संशोधन बिल ला सकती है, ताकि 2029 के चुनाव से यह व्यवस्था लागू हो सके। यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा, यानी 2029, 2034 और 2039 के चुनाव तक लागू रहेगा। इसके बाद इसे बढ़ाने या खत्म करने का फैसला संसद करेगी। आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी और इसमें एससी-एसटी महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में परिसीमन अहम होगा। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर नई सीटें तय करना चाहती है, जबकि अभी तक 1971 की जनगणना के आधार पर सीटें तय होती हैं। इसके लिए एक परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या पूर्व जज द्वारा की जाएगी। इस आयोग का फैसला अंतिम होगा।
इस प्रस्ताव को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण का समर्थन है, लेकिन इसे परिसीमन और सीट बढ़ाने से जोड़ना सही नहीं है। कुछ नेताओं का कहना है कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान हो सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
इस बिल को पास कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होगी। मौजूदा स्थिति में सरकार को अन्य दलों का समर्थन लेना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सीटें बढ़ने पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा सीटें बढ़ सकती हैं।
2029 से लागू हो सकता है महिला आरक्षण, लोकसभा सीटें 850 करने की तैयारी; विपक्ष ने उठाए सवाल

