August 22, 2026

यूपी में जूनियर इंजीनियरों की नौकरी बहाल, हाई कोर्ट बोला- अधिकारियों की गलती की सजा कर्मचारियों को नहीं

UP Jal Nigam junior engineers job restoration Allahabad High Court

Lucknow/Alive News: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश जल निगम में 2013 में नियुक्त किए गए सामान्य वर्ग के जूनियर इंजीनियरों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस इरशाद अली की पीठ ने राकेश प्रताप सिंह समेत 26 जूनियर इंजीनियरों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उनकी सेवा समाप्ति के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों की गलती की सजा उन कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती, जिनकी नियुक्ति स्वीकृत पदों पर नियमित चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं पर धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने या चयन प्रक्रिया में हेराफेरी का कोई आरोप नहीं था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति को कानून के अनुसार लागू करना जरूरी है, लेकिन आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों को ठीक करने के नाम पर ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती, जो कानून और मूल चयन प्रक्रिया के खिलाफ हो।

यह मामला 2013 में जल निगम द्वारा जूनियर इंजीनियरों के 470 पदों पर की गई भर्ती से जुड़ा है। बाद में आरक्षित वर्ग के कुछ उम्मीदवारों के चयन को लेकर आपत्तियां उठीं। जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में योग्य आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उपलब्ध रिक्तियों पर समायोजित करने की सिफारिश की थी। समिति ने यह भी कहा था कि पहले से चयनित सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को सेवा से नहीं हटाया जाए।

इसके बावजूद 136 अतिरिक्त SC/OBC उम्मीदवारों की नियुक्ति के बाद कुल नियुक्तियों की संख्या 543 हो गई। इसके बाद 2 दिसंबर 2014 को राकेश प्रताप सिंह समेत सामान्य वर्ग के 73 जूनियर इंजीनियरों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। कर्मचारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया और अदालत ने 18 दिसंबर 2014 को बर्खास्तगी के आदेश रद्द करते हुए जल निगम को मामले पर पुनर्विचार का निर्देश दिया था।

हाई कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में कहा कि पहले का न्यायिक आदेश जल निगम के लिए बाध्यकारी था, इसके बावजूद अधिकारियों ने उसके विपरीत कार्रवाई की। कोर्ट ने यह भी कहा कि कारण बताओ नोटिस केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए और कर्मचारियों द्वारा उठाई गई महत्वपूर्ण आपत्तियों पर सक्षम अधिकारी को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अदालत ने 14 मई 2015 के बर्खास्तगी आदेशों को रद्द करते हुए याचिकाकर्ताओं को सेवा में बनाए रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि वे 21 अक्टूबर 2013 की मूल नियुक्ति तिथि से निरंतर सेवा का लाभ पाने के भी हकदार होंगे। फैसले से प्रभावित जूनियर इंजीनियरों को बड़ी राहत मिली है।