August 22, 2026

राजस्थान में लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन जरूरी, बाहर रहने वाले राजस्थानियों पर भी लागू होगा UCC

Rajasthan UCC Bill 2026 live-in relationship registration rules

Jaipur/Alive News: राजस्थान सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 (UCC Bill) पेश कर दिया है। करीब 400 पन्नों के इस विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। प्रस्तावित कानून के तहत राजस्थान में रहने वाले लोगों के लिए लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।

सरकार के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति राजस्थान का निवासी नहीं है, लेकिन राज्य में रह रहा है और लिव-इन रिलेशनशिप में है, तो उस पर भी यह नियम लागू होगा। वहीं, राजस्थान का कोई नागरिक अगर किसी दूसरे राज्य में रह रहा है और लिव-इन रिलेशनशिप में है, तो उसके लिए भी रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।

राज्य के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान में अस्थायी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों पर यह प्रावधान लागू नहीं होगा। ऐसे लोग शिक्षा, रोजगार या अन्य कारणों से सीमित अवधि के लिए राज्य में रह रहे होते हैं।

विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को भी वैध मानने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, हर लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकेगा। यदि दोनों में से कोई एक पहले से शादीशुदा है, तो ऐसे रिश्ते का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।

इसके अलावा, यदि दोनों व्यक्ति कानून में निर्धारित प्रतिबंधित नातेदारी की डिग्री के भीतर आते हैं, तो उनका लिव-इन रजिस्टर नहीं किया जाएगा। जबरदस्ती, दबाव, गलत प्रभाव या बिना सहमति के बनाए गए लिव-इन संबंधों का भी रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।

विधेयक की धारा 384 से 401 तक लिव-इन रिलेशनशिप, उसके रजिस्ट्रेशन, बच्चों की स्थिति, रजिस्ट्रेशन नहीं कराने के प्रभाव और दंड से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य लिव-इन संबंधों को कानूनी ढांचे के भीतर लाना और संबंधित लोगों के अधिकारों की सुरक्षा करना है।

सरकार के अनुसार, UCC विधेयक का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता, न्याय और एकरूपता सुनिश्चित करना है। इसके तहत शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में समान नियम लागू करने का प्रस्ताव है।

राज्य सरकार का कहना है कि यह विधेयक पंथनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, विधेयक के प्रावधान विधानसभा से पारित होने और कानून के रूप में लागू होने के बाद ही प्रभावी होंगे।