October 20, 2021

भाग -2 : लोकतंत्र कैसे मरता है, पढ़िए

जे.बी.शर्मा

उपरोक्त शीर्षक से संबंधित लेख के दूसरे भाग का आरंभ हम, How Democracies Die, पुस्तक के लेखकों के संक्षिप्त परिचय से करना चाहेंगे। जनवरी 17,1968 में जन्में स्टिवन लेवितस्की अमेरिका के राजनीतिक वैज्ञानिक और हार्वड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। तुलनात्मक राजनीतिक वैज्ञानिक- अनुसंधान क्षेत्र के साथ-साथ लेटिन अमेरिका और राजनैतिक पार्टियों और जिसमें पार्टी स्सिटम भी शामिल है पर उनका ध्यान केन्द्रीत है।

वहीं डेनियल जि़बलात का जन्म 1972 में हुआ। वे अमेरिका के राजनीतिक वैज्ञानिक और हार्वड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। जिनका तुलनात्मक राजनीति, डेमोक्रेसी और डेमोक्रेटाइज़ेशन के अलावा पश्चिम यूरोप की राजनीति और राजनैतिक इतिहास पर ध्यान केन्द्रीत है। वे सन् 2018 से हार्वड युनिवर्सिटी के ईएटन में साइंस आफ गर्वनमेंट के प्रोफेसर हैं। पहले भाग में हम बता चुके हैं कि किस प्रकार से पुस्तक में उल्लेखित विवरण के अनुसार 11 सिंतबर 1973 की दोपहर को एक अक्रामक घटना घटती है, जिसके चलते कुछ महीनों की बढ़ती बेचैनी के कारण लोग सेंटीएगो, चिली की सड़कों पर उतर आए थे। वहीं दक्षिण अमरिका के चिली देश की राजधानी सेंटीएगो के नव-आदर्श राष्ट्रपति- राजमहल- ला-मोनेडा को ब्रिटिश के हंटर विमानों द्वारा बंबारी करके तबाह कर दिया जाता है। परिणामत: राज-भवन की सुरक्षा में जुटी मिलेट्री पुलिस ने सलेवेडर को मुक्त कर दिया और उनके नाफरमानी के पैगाम का नशर हो रहा प्रोग्राम खामोश कर दिया गया। इस घटना के मात्र एक घंटे बाद सलेवेडर एलेंडा की मौत हो जाती है। उसी के साथ ही वहां के लोकतंत्र की। चिली में हुई कथित घटना इस बात का प्रमाण है कि ताकत के सामने सब कुछ बोना है।

अब आगे:-
In the introduction of the said book what writers further described about the dying- democracies; is like this:-[sic]
This is how we tend to think of democracies dying: at the hands of men with guns. During the Cold War, coups d’e’tat accounted for nearly three out of every four democratic break downs. Democracies in Argentina, Brazil, The Dominican Republic, Ghana, Greece, Guatemala,Nigeria, Pakistan, Peru, Thailand, Turkey, and Uruguay all died this way. More recently, military coups toppled Egyptian President Mohamed Morsi in 2013 and Thai Prime Minister Yingluck Shinawatra in 2014. In all these cases, democracy dissolved in spectacular fashion, though military power and coercion.

अर्थात- इस प्रकार हम देख-समझ सकते हैं कि किस प्रकार बंदूकधारी लोगों द्वारा लोकतंत्र को रौंदा जाता है। शीत युद्ध के दौरान चार में से तीन कमज़ोर लोकतंत्र के कुचले जाने व तख्तापलट करने का ढंग ही जि़म्मेदार है। मिसाल के तौर पर डेमोक्रेसी इन अर्जनटाइना, ब्राज़ील, दी डोमिकेन रिपब्लिक, गहाना, ग्रीस, गोअतमाला, नाइज़ीरिया, पाकिस्तान, पेरू, थाईलैंड, तुर्की और उरगेय जैसे देशों में coups d’e’tat के ज़रिए ही डेमोक्रेसी को कुचला व समाप्त किया गया। इस का अन्य ज्वलंत उदाहरण सन् 2013 में इजिपशियन प्रेज़ीडेंट- मोहम्मद मुरसी को मिलिट्री द्वारा उखाड़ फेका है। ठीक इसी प्रकार सन् 2014 में थाई के प्रधानमंत्री यिंगलक शीनावात्रा को भी फौज की मदद से अपदस्थ करके लोकतंत्र समाप्त कर दिया गया। उक्त सभी मामलों में बड़े भव्य ढंग से सैन्य -बल के प्रयोग द्वारा- ज़ोर-ज़बरदस्ती करके कथित देशों से लोकतंत्र को विच्छेद कहें या भंग कर दिया गया। अब इससे पहले लोकतंत्र कहां-कहां कैसे समाप्त किया गया या कहें कि इसको समाप्त करने के उत्कट-उग्र प्रयास किए जा रहे हैं पर अपनी चर्चा जारी रखें। हम एक अन्य पुस्तक की सहायता से यह जानने समझने की कोशिश करते हैं कि लोकतंत्र की बुनयादी अवधारणा और सिंद्धांत क्या कहते हैं?

इस पुस्तक का शीर्षक है:
Democracy 80 Questions and Answers written by David Beetham- Kevin Boyle
Introduction by Nikhil Chakravarty
(National Book Trust, India) [sic]
Basic Concepts and Principles
What is democracy?

Throughout our lives we are members of different groups or associations, from families, neighbourhoods, clubs and work-units to nations and states. In all such associations, from the smallest to largest, decisions have to be taken for the association as whole: about the goals to be pursued, about the rules to be followed, about the distribution of responsibilities and benefits between members. These can be called collective decisions, in contrast to individual decision taken by people on behalf of themselves alone. Democracy belongs to this sphere of collective decision-making. It embodies the ideal that such decisions, affecting an association as a whole, should be taken by all its members, and that they should each have equal right to take part in such decisions. Democracy in other words, entails the twin principles popular control over collective decision-making and equality of rights in the exercise of that control. To the extent that these principles are realized in the decision-making of any association, we can call it democratic.

उपरोक्त पुस्तक के दोनो ऑथरस् अलग-अलग देश के है। एक यूनाइटिड किंडम से और दूसरा अमेरिका से। डेविड बीथेम यूके से और केविन बोयले अमेरिका से। लेकिन,, Democracy 80 Questions and Answers नामक पुस्तक इन दोनों के संयुक्त प्रयास से लिखी गई। डेमोक्रेसी की बुनियादी अवधारणा और सिद्धांतों को सामने रखते हुए: वे इस सवाल की व्याख्या करते है कि- डेमोक्रे सी है क्या?

Democracy 80 Questions and Answers


हमारा जीवन शुरू से अंत तक चाहे देश हो प्रदेश – अलग-अलग समूहों या संगठनों, परिवारों, पड़ोस कहें प्रतिवेशों क्लबस् और कार्य-इकाईयों का सदस्य बन कर गुज़रता है। कुल मिलाकर ऐसे सभी छोटे-बड़े संगठनों में काम-काज आदि को लेकर निर्णय लेने ही पड़ते हैं। चाहें संगठन की उद्देश्य की प्राप्ती संबंधी हो, या नियम-कायदों से सम्बंधित हों, या संगठन के कार्यों की जि़म्मेदारी सौंपने से संबंधी हो या फिर सदस्यों के लाभ के बंटवारे से सम्बंधित ही हों। उक्त के विपरीत, ऐसे सभी लिए गए निर्णय व्यक्तिगत निर्णय कहलाते हैं, जो लोगों के बिना पर स्वयं लिये जाते हैं। डेमोक्रेसी का अभिप्राय सामूहिक निर्णय लेने संबंधी क्षेत्र से ही होता है। यह सामूहिक निर्णय लेने का ढंग या प्रथा संगठन को एक आर्दश मूर्त रूप बनाती है कुल मिला कर संगठन को प्रेरित करती है कि निर्णय सामूहिक लिये जाने चाहिए और हर इक सदस्य की ऐसे निर्णय लेने में भूमिका होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो डेमोक्रेसी दो सिद्धांतों को आवश्यक बनाती है कि सामूहिक निर्णय-लेने पर जन-नियंत्रण होना चाहिए और उक्त नियंत्रण-अनुशासन पर सभी का समान अधिकार होना चाहिए। एक हद तक सामूहिक-निर्णय के ये सिंद्धांत किसी भी संगठन में माने गए हैं और इसी को लोकतंत्र कहते हैं।
क्रमश…

(लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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