August 29, 2026

नेपाल में बाढ़-भूस्खलन का खतरा बरकरार, 2 नई झीलों से बढ़ी चिंता; 2,500 लोग लापता

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद बनी नई झील और प्रभावित क्षेत्र

International/Alive News: नेपाल और तिब्बत में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन के कारण दो नई झीलें बन गई हैं। इनमें से एक से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आसपास के इलाकों में दोबारा बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। तेज पानी अपने साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी चट्टानें लेकर नीचे के क्षेत्रों में पहुंचा। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे बड़ी संख्या में गांवों का संपर्क टूट गया है।

2,500 लोग लापता, 320 भारतीय भी शामिल

नेपाल और तिब्बत में आपदा के बाद मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं। अलग-अलग एजेंसियों के मुताबिक नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और करीब 2,500 लोग लापता हैं। लापता लोगों में करीब 320 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिकों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

दूसरी झील से बढ़ा खतरा

वैज्ञानिकों और राहत एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता भूस्खलन से बनी दूसरी झील को लेकर है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका पानी अस्थिर है। यदि इसका प्राकृतिक बांध टूटता है तो नीचे के इलाकों में अचानक बड़ी मात्रा में पानी पहुंच सकता है।

बताया गया है कि पहली झील का बांध शुक्रवार को टूट चुका है। ऐसे में दूसरी झील का पानी पहली झील में पहुंचने पर बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है। प्रशासन दोनों झीलों की निगरानी कर रहा है। इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है और नदी के निचले हिस्सों में कैमरे व सेंसर लगाने की तैयारी है।

कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा

बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले पासांग ल्हामु हाईवे का 40 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा प्रभावित हुआ है। इससे उत्तरी रसुवा जिला देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। ग्यिरोंग पोर्ट तक जाने वाला महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग भी बंद हो गया है।

रसुवा और नुवाकोट के 18 से अधिक पहाड़ी गांवों में सड़क संपर्क टूट गया है। तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और थुमन जैसे इलाकों तक पहुंचने के लिए फिलहाल हेलिकॉप्टर या पैदल रास्तों का सहारा लिया जा रहा है।

42 बेली ब्रिज के लिए भारत-चीन से मांगी मदद

नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है। बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के कई पुल बह गए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। भारत ने भी जरूरत पड़ने पर नेपाल को बेली ब्रिज सहित हर जरूरी सहायता देने की बात कही है।

नेपाल में 13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे

नेपाल सरकार के अनुसार राहत और बचाव अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। इनमें नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाली सेना के 4,200 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 1,845 जवान शामिल हैं।

सरकार के मुताबिक अब तक 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रधानमंत्री राहत कोष में अरबों रुपये जमा

बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए बनाए गए नेपाल के प्रधानमंत्री राहत कोष में अब तक 4.38 अरब नेपाली रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ बैंकों में विदेशी मुद्रा के रूप में भी राहत राशि जमा हुई है।

कुशीनगर में मिले तीन शव

भारत के उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से तीन शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि ये शव नेपाल में आई बाढ़ के दौरान बहकर भारत पहुंचे हो सकते हैं। इससे पहले महराजगंज जिले में भी चार अज्ञात शव मिले थे। शवों की पहचान के लिए भारतीय अधिकारी नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में हैं।

नेपाल ने भारत का जताया आभार

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भारत की ओर से दिए जा रहे सहयोग के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार जताया। उन्होंने भारत सरकार की चिंता, सहयोग और एकजुटता के लिए नेपाल की जनता और सरकार की ओर से धन्यवाद दिया।

UN ने साफ पानी और भोजन की जरूरत बताई

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार नेपाल में हजारों परिवारों को अभी भोजन और पीने के साफ पानी की जरूरत है। राहत और बचाव कार्य में कई देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सहायता बढ़ाई है। यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री और आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार नेपाल और चीन में आई बाढ़ के बाद करीब 90 अमेरिकी नागरिकों का अभी पता नहीं चला है। पांच अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। अमेरिका ने नेपाल के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है।

तिब्बत में भी स्थिति गंभीर

चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत में बाढ़ से 7 लोगों की मौत हुई है और 554 लोग लापता बताए गए हैं। हालांकि तिब्बत में जानकारी सीमित होने के कारण वहां हुए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।

चीन में इंटरनेट और मीडिया पर सरकारी नियंत्रण के कारण बाढ़ से जुड़े कई वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ग्यिरोंग पोर्ट की बाढ़ के वीडियो सोशल मीडिया पर दुनिया के अन्य हिस्सों में तेजी से वायरल हुए, लेकिन चीन के भीतर इनकी पहुंच सीमित रही।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। लापता लोगों की तलाश की जा रही है और प्रभावित इलाकों में दोबारा बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में अलग-अलग एजेंसियों के बीच अंतर होने के कारण संख्या आगे भी बदल सकती है।