Faridabad/Alive News: सेक्टर-12 स्थित एचएसवीपी ग्राउंड में आयोजित सरस मेले में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कारीगर अपनी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ से आईं कनिश फातिमा ने अपने हैंडमेड लखनवी चिकनकारी के परिधान का स्टॉल लगाया है। उनके स्टॉल पर चिकनकारी के खूबसूरत सूट, लॉन्ग कुर्ती और शॉर्ट कुर्ती उपलब्ध हैं, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
कनिश फातिमा ने बताया कि लखनवी चिकनकारी लखनऊ की बेहद प्रसिद्ध और पारंपरिक कढ़ाई कला है। यह कला सैकड़ों साल पुरानी है और भारतीय संस्कृति में इसका खास स्थान है। चिकनकारी की पहचान इसकी बारीक, नाजुक और सादगी से भरी कढ़ाई से होती है, जो कपड़ों को बेहद खूबसूरत बना देती है।
उन्होंने बताया कि चिकनकारी बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह मेहनत और समय पर आधारित होती है। सबसे पहले कपड़े पर डिजाइन हाथ से बनाया जाता है, इसके बाद उस पर अलग-अलग तरह की पारंपरिक सिलाई से कढ़ाई की जाती है। इसमें बखिया, फंदा, मुर्री, जाली,टेपची जैसे कई प्रकार के सिलाई लगाई जाती हैं। एक ही परिधान पर कई कारीगर अलग-अलग चरणों में काम करते हैं। एक सूट या कुर्ती तैयार होने में कई दिन, तो कभी-कभी हफ्तों तक का समय लग जाता है।
फातिमा ने बताया कि आज के मशीनी युग में चिकनकारी को मशीनों से भी बनाया जाने लगा है, लेकिन हाथ से की गई चिकनकारी की खूबसूरती, मजबूती और बारीकी मशीन के काम से कहीं बेहतर होती है। यही कारण है कि हैंडमेड चिकनकारी ज्यादा पसंद की जाती है और इसलिए इसकी कीमत भी अधिक होती है।
चिकनकारी महंगी होने का कारण इसकी मेहनत भरी प्रक्रिया, समय और कारीगरों की बारीक कारीगरी है। हर सिलाई हाथ से की जाती है, जिससे कपड़े की क्वालिटी और सुंदरता बनी रहती है। इसके अलावा यह कढ़ाई भारतीय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसकी अपनी अलग पहचान है।
सरस मेले में कनिश फातिमा के स्टॉल पर चिकनकारी के परिधान की कीमत डिजाइन और कढ़ाई के अनुसार तय की गई हैं। यहां शॉर्ट कुर्तियां लगभग 1500 से 3000 रुपये तक, लॉन्ग कुर्तियां 2500 से 6000 रुपये तक और चिकनकारी सूट 4000 से 10,000 रुपये या उससे अधिक कीमत में उपलब्ध रहें।
सरस मेला लखनऊ की पारंपरिक चिकनकारी जैसी कलाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।

