June 25, 2026

पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, सरकार ने 56 साल पुराने कानून और हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला

Indian Passport पर सरकार का स्पष्टीकरण, नागरिकता प्रमाण को लेकर नई चर्चा

New Delhi/Alive News: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं रहा है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में कोई नई नीति लागू नहीं की गई है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही कानूनी व्यवस्था को दोहराया गया है। इसके लिए सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और बॉम्बे हाईकोर्ट के 2013 के फैसले का हवाला दिया है।

सरकार के अनुसार, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 में प्रावधान है कि जनहित में केंद्र सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है जो भारत का नागरिक न हो। इसलिए केवल पासपोर्ट का होना भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता।

सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के वर्ष 2013 के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट होने मात्र से किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता स्वतः सिद्ध नहीं होती।

विवाद कैसे शुरू हुआ?

यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर विदेश मंत्रालय के एक बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज मान्य होगा।

सिब्बल ने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में नागरिकों की नागरिकता पर सवाल उठाए जा सकते हैं और उन्हें मतदान के अधिकार से भी वंचित किया जा सकता है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने कपिल सिब्बल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय ने कोई नई व्यवस्था लागू नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह एक स्थापित कानूनी स्थिति है, जिसे पहले भी अदालतों द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है।

मालवीय ने बताया कि भारतीय नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के नागरिकता रिकॉर्ड, स्कूल रिकॉर्ड, मतदाता सूची में नाम, सरकारी सेवा रिकॉर्ड, भूमि एवं निवास संबंधी दस्तावेज, पासपोर्ट और अन्य संबंधित रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सकता है।

क्या है कानूनी स्थिति?

विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण पहचान और यात्रा दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। किसी व्यक्ति की नागरिकता का निर्धारण उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।