Faridabad/Alive News: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) फरीदाबाद ने शहर के नर्सिंग होम्स, अस्पतालों और चिकित्सकों के खिलाफ बार-बार की जा रही कथित संदिग्ध एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई है। आईएमए का कहना है कि कुछ लोग खुद को समाजसेवी बताकर विभिन्न नर्सिंग होम्स और डायग्नोस्टिक सेंटरों के खिलाफ अलग-अलग सरकारी विभागों में शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
आईएमए के अनुसार, इन शिकायतों में बिल्डिंग नक्शा, बिजली संबंधी दस्तावेज, सीएलयू, फायर एनओसी, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और पीएनडीटी समेत अन्य मामलों की जांच की मांग की जाती है। शिकायतें सीएम विंडो, विजिलेंस और फ्लाइंग स्क्वायड सहित विभिन्न विभागों में भेजी जा रही हैं। संस्था का आरोप है कि एक विभाग में शिकायत का मामला समाप्त होने के बाद उसी विषय को दूसरे विभाग में शिकायत के रूप में भेज दिया जाता है।
आईएमए फरीदाबाद ने कहा कि उसे किसी भी वैध जांच या सरकारी निरीक्षण पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन बार-बार होने वाली शिकायतों और जांच प्रक्रियाओं के कारण डॉक्टरों का काफी समय विभागों के चक्कर लगाने में खर्च हो रहा है, जिससे मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
संस्था ने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में पैसों के लेन-देन के जरिए शिकायत या मामला समाप्त करने की बातें भी सामने आई हैं। आईएमए ने ऐसे मामलों की उचित जांच और कार्रवाई की मांग की है।
आईएमए फरीदाबाद के अनुसार, फिलहाल फरीदाबाद नगर निगम क्षेत्र में ऐसी प्रभावी नीति उपलब्ध नहीं है, जिसके तहत कई नर्सिंग होम्स अपनी संपत्तियों या संस्थानों को नियमित कराने अथवा सीएलयू से संबंधित प्रक्रिया पूरी कर सकें।
इस मुद्दे को लेकर आईएमए के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन, मंत्रियों, विधायकों और शहर के प्रमुख नागरिकों से मुलाकात कर कथित दुर्भावनापूर्ण शिकायतें करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आईएमए फरीदाबाद की कोर कमेटी ने यह भी निर्णय लिया है कि संस्था ऐसे लोगों की सूची तैयार करेगी, जिनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण शिकायतें करने के आरोप सामने आते हैं। संस्था ने कहा कि इस संबंध में अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्क रहने के लिए जानकारी साझा करने पर भी विचार किया जा रहा है।
आईएमए ने प्रशासन से अपील की है कि शिकायत करने के अधिकार का कथित दुरुपयोग कर डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों को परेशान करने वाले मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए, ताकि चिकित्सक बिना अनावश्यक बाधा के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें।

