Faridabad/Alive News: औद्योगिक नगरी में प्रॉपर्टी का मिक्स यूज करने वाले लोगों को अब दोगुना संपत्ति कर देना पड़ेगा। इससे नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले करीब एक लाख से अधिक लोगों पर संपत्ति कर का दोगुना बोझ पड़ेगा।
क्योंकि अधिकतर लोगों ने रिहायशी क्षेत्र में अपना कारोबार किया हुआ है। NIT में अधिकतर कॉलोनियां और सेक्टर ऐसे है। जिनमें घरों में दुकानें या वर्कशॉप डाली हुई है।
शहरी स्थानीय निकाय की नई पॉलिसी के अनुसार रिहायशी क्षेत्र में रहने वाले लोग अपनी प्रॉपर्टी का मिक्स यूज कर रहे है। जिन्होंने घर में ही दुकानें खोली हुई है। उनसे दोगुना संपत्ति कर वसूला जाएगा। जिन लोगों का सालाना कर 500 रुपये आ रहा था।
उनसे अब संपत्ति कर एक हजार रुपये वसूला जाएगा। इसके साथ ही एचएसवीपी के सेक्टरों में जिन लोगों ने नक्शे के अनुसार मकान में आगे और पीछे जगह नहीं छोड़ी है। उनको भी दोगुना कर चुकाना होगा।
दोगुना टैक्स नहीं चुकाने की स्थिति में बंद करना होगा व्यवसाय
कराधान शाखा के अधिकारियों के अनुसार नई पॉलिसी में कई पेच है। जिसके लिए सरकार से मार्गदर्शन मांगा गया है। नई पॉलिसी के अनुसार अगर रिहायशी क्षेत्र में बने मकान में कोई व्यवसायिक गतिविधि कर रहा है तो उसको दोगुना टैक्स चुकाना होगा।यदि वह दोगुने कर से बचना चाहता है तो उसको नक्शे के अनुसार मकान को दोबारा से बनाना होगा। इसके साथ ही वाणिज्यिक गतिविधि भी पूरी तरह से बंद करनी होगी। इसके साथ ही हर कालोनी में कलेक्टर रेट के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स तय होगा। यानिकी ही एक ही विधानसभा में स्थित दो कालोनियों में बने मकानों का प्रॉपर्टी टैक्स अलग-अलग आएगा। इसके साथ जो कॉलोनियां हाल में ही सरकार की ओर से नियमित की गई है। उनका प्रॉपर्टी टैक्स अलग होगा।
प्रॉपर्टी दुरुस्त कराने को लेकर पहले ही लोग परेशान
नई पॉलिसी की वजह से अब आम लोगों की भी परेशानी बढ़ जाएगी। क्योंकि नए स्तर पर लोगों को अपना रिकॉर्ड प्रॉपर्टी ID में भी दुरुस्त करवाना होगा। पहले ही लोग प्रॉपर्टी ID में खामियों को लेकर परेशान है। अभी तक निगम की ओर से केवल 7.38 में से 2.34 ID का सत्यापन और दुरुस्त की गई है।
वर्जन
प्रॉपर्टी ID और टैक्स को लेकर पहले ही आम पब्लिक परेशान है। नई पॉलिसी को लेकर आम लोगों को कुछ भी जानकारी नहीं है। इसके साथ ही शहर की 75 प्रतिशत आबादी पर दोगुने कर की मार पड़ेगी।
- दीपक यादव, पार्षद, वार्ड-42
नई पॉलिसी को लेकर अभी कुछ चीजे अस्पष्ट नजर आ रही है। इसको लेकर शहरी स्थानीय निकाय को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
– दीपक कुमार, जेडटीओ मुख्यालय, नगर निगम

