July 15, 2026

फरीदाबाद: टेलीग्राम टास्क और क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की साइबर ठगी, 10 आरोपी गिरफ्तार

Faridabad/Alive News: घर बैठे पार्ट-टाइम नौकरी और क्रिप्टो ट्रेडिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर 43.12 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का फरीदाबाद पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले में अब तक एक महिला सहित 10 आरोपियों को नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम और रोहतक से गिरफ्तार किया है।

​पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3.10 लाख नकद, दो सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद किया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि गिरोह के फरार अन्य सदस्यों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

​व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुआ ठगी का खेल
​पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, सेक्टर-31 निवासी एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 15 मई 2026 को उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था। इसके बाद टेलीग्राम के माध्यम से उसे घर बैठे पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन टास्क पूरा कर मोटी कमाई का लालच दिया गया।

​शुरुआत में पीड़ित को ई-कॉमर्स वेबसाइट के प्रोडक्ट्स के लिंक पर क्लिक कर स्क्रीनशॉट भेजने जैसे आसान काम दिए गए। भरोसा जीतने के लिए ठगों ने शुरुआत में कुछ छोटी रकम पीड़ित के खाते में ट्रांसफर भी की। जब पीड़ित को यकीन हो गया, तो उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग में अधिक निवेश करने के लिए उकसाया गया।

​काल्पनिक मुनाफे का जाल: 15 दिनों में ऐंठे 43.12 लाख
​ठगों ने एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पीड़ित का अकाउंट बनाकर उसमें 30 से 50 प्रतिशत तक का काल्पनिक (Fake) मुनाफा दिखाया। इस झांसे में आकर पीड़ित ने 17 मई से 1 जून 2026 के बीच ठगों द्वारा बताए गए 14 बैंक खातों और 6 UPI आईडी में कुल ₹43,12,928 ट्रांसफर कर दिए।

​जब पीड़ित ने अपनी मूल राशि और मुनाफा निकालने (विड्रॉ) का प्रयास किया, तो आरोपियों ने निकासी रोक दी। इसके बाद खाता अपग्रेड शुल्क, केवाईसी चार्ज, एडवांस टैक्स और अन्य शुल्कों के नाम पर और पैसों की मांग की जाने लगी। खाता सस्पेंड होने का डर दिखाकर एक नया खाता भी खुलवाया गया, लेकिन पीड़ित को फूटी कौड़ी वापस नहीं मिली। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

​तीन चरणों में हुई ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां
​पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग लोग बैंक खाते, सिम कार्ड और ओटीपी (OTP) का इंतजाम कर रहे थे।

​17 जून (पहली कार्रवाई): पुलिस ने प्रशांत शर्मा (आगरा), विक्रम सिंह (बिहार/नोएडा) और विवेक कुमार (बिहार/नोएडा) को गिरफ्तार किया। विवेक के खाते में ठगी के ₹3.80 लाख आए थे, जिसने अपना खाता विक्रम और प्रशांत के जरिए साइबर ठगों तक पहुंचाया था।
​2 जुलाई (दूसरी कार्रवाई): दिल्ली के प्रेम नगर और सुल्तानपुरी से गौरव कुमार, रेहान अहमद शाह और रणजीत को पकड़ा गया। रणजीत ने विकास नाम के व्यक्ति का खाता उपलब्ध कराया था (विकास फिलहाल फरार है)। गौरव के नाम की सिम का इस्तेमाल रेहान ओटीपी शेयर करने के लिए कर रहा था।
​9 जुलाई (तीसरी कार्रवाई): पुलिस ने मनोज (भिवानी), दीपक (रोहतक), अस्मित (हरिद्वार) और रोहतक की एक महिला को गिरफ्तार किया। मनोज ने अपनी महिला मित्र के नाम पर खाता खुलवाकर दीपक और अस्मित के माध्यम से ठगों तक पहुंचाया था।