New Delhi/Alive News: देश में मॉनसून की शुरुआत अच्छी रही है और 4 जून को केरल पहुंचने के बाद यह तेजी से कई राज्यों तक फैल चुका है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के कारण इस साल मॉनसून कमजोर पड़ सकता है और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने 197 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां अल नीनो का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। किसानों और फसलों को बचाने के लिए सरकार ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक मौसमीय घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव के कारण होती है। इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है। भारत में अल नीनो आमतौर पर मॉनसून को कमजोर करता है और बारिश कम होने की संभावना बढ़ा देता है।
मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है और बारिश लंबे समय के औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
सरकार ने शुरू किया ‘खेत बचाओ अभियान’
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अल नीनो के खतरे को देखते हुए कृषि मंत्रालय अलर्ट पर है।
सरकार ने:
- 197 संवेदनशील जिलों की पहचान की है।
- सभी राज्यों के लिए आपातकालीन योजना तैयार की है।
- बीज और कृषि सामग्री का पर्याप्त भंडारण किया है।
- हर सप्ताह समीक्षा बैठकें शुरू की हैं।
- किसानों तक सहायता पहुंचाने के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया है।
मॉनसून की वर्तमान स्थिति
मॉनसून केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है। पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों में भी अच्छी बारिश हो रही है।
मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून देश के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से को कवर कर चुका है और 15 जुलाई तक पूरे देश में फैलने की संभावना है।
अगस्त-सितंबर में बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के अंत से अल नीनो ज्यादा सक्रिय हो सकता है। अगस्त और सितंबर में इसके प्रभाव से बारिश में बड़ी कमी आ सकती है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी चेतावनी दी है कि अगस्त तक अल नीनो के सक्रिय होने की 80 प्रतिशत संभावना है। सितंबर तक इसके और मजबूत होने के संकेत हैं।
किन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर?
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- पंजाब
- हरियाणा
- राजस्थान
- दिल्ली-NCR
मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, रीवा, शहडोल, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई गई है।
किसानों और शहरों पर क्या होगा असर?
देश के लगभग 60 प्रतिशत किसान खरीफ फसलों, विशेषकर धान की खेती के लिए मॉनसून पर निर्भर हैं। यदि बारिश कम होती है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
वहीं दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में भी कम बारिश के कारण जलाशयों का जलस्तर घट सकता है और पेयजल संकट गहराने की आशंका है।

