September 8, 2026

दिल्ली PG हादसे के बाद सभी इमारतों की जांच, MCD ने 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

दिल्ली सत्य निकेतन PG बिल्डिंग हादसे के बाद इमारतों की जांच करती MCD टीम

New Delhi/Alive News: सत्य निकेतन में इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी की इमारतों की व्यापक जांच कराने के आदेश दिए हैं। सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने-अपने क्षेत्रों की इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए। हादसे के बाद MCD ने इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर यह बड़ा कदम उठाया है।

जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में शामिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। MCD के अनुसार, इस साल की शुरुआत में किए गए सर्वे में 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों की जांच की गई थी, लेकिन इनमें केवल 19 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया था।

प्रॉपर्टी मालिक समेत तीन गिरफ्तार

पुलिस ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के मामले में प्रॉपर्टी मालिक उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जबकि इसका प्रबंधन पति और बेटा संभाल रहे थे।

तीनों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस अब PG संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है।

हादसे के बाद करीब 28 घंटे तक बचाव अभियान चलाया गया। मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए हैं और कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड

हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें इंजीनियरिंग विभाग के चार अधिकारी भी शामिल हैं। विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक उन्हें निलंबित रखा जाएगा। इसके अलावा IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को MCD के साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

सत्य निकेतन के 170 मकानों में चल रहे हैं PG

सत्य निकेतन इलाके में करीब 300 मकान हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में PG संचालित हो रहे हैं। यह इलाका लंबे समय से छात्रों के रहने का प्रमुख केंद्र रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के लिए नहीं बनाई गई थीं। ऐसे में अवैध निर्माण और अतिरिक्त मंजिलों का दबाव इमारतों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।