Faridabad/Alive News: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन महारानी माता वैष्णो देवी मंदिर में मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की भव्य रूप से पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने प्रातःकालीन आरती, हवन और यज्ञ का शुभारंभ करवाया। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु सुबह से ही कतारों में खड़े होकर मां चंद्रघंटा के दर्शन करते नजर आए।
इस अवसर पर शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति आर.के. जैन ने भी मंदिर पहुंचकर माता रानी के समक्ष ज्योति प्रज्वलित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिर प्रधान जगदीश भाटिया ने सभी श्रद्धालुओं को नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए माता रानी की चुनरी और प्रसाद भेंट किया।
अपने संबोधन में जगदीश भाटिया ने मां चंद्रघंटा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से माता रानी की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। उन्होंने बताया कि मां चंद्रघंटा वीरता, साहस और शक्ति का प्रतीक हैं और उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण उन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि इस दिन पीले या सुनहरे वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है। मां की आराधना से निर्भयता, सौम्यता, एकाग्रता और जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है। पूजा के दौरान माता को पीले या लाल फूल, चंदन, अक्षत, सिंदूर और धूप-दीप अर्पित करना चाहिए तथा केसर की खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना लाभकारी होता है।
भक्तों को 108 बार “ॐ देवी नम:” मंत्र का जाप करने और अंत में कपूर या घी के दीपक से मां चंद्रघंटा की आरती कर सुख-समृद्धि की कामना करने का संदेश भी दिया गया।

