August 30, 2026

CJI सूर्यकांत बोले- गंभीर मामलों में संसद के कानून का इंतजार नहीं करती न्यायपालिका; डिजिटल अरेस्ट पर लिया स्वत: संज्ञान

लंदन में आर्थिक अपराध सम्मेलन को संबोधित करते CJI सूर्यकांत

New Delhi/Alive News: भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका गंभीर और नए तरह के अपराधों के मामलों में संसद द्वारा कानून बनाए जाने का इंतजार नहीं करती। उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर फ्रॉड के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने सक्रियता दिखाई है और समस्या की गंभीरता को देखते हुए स्वत: संज्ञान लिया है।

CJI सूर्यकांत ने शनिवार को लंदन में आयोजित 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इकोनॉमिक क्राइम के समापन समारोह में यह बात कही। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर स्वत: संज्ञान लिया है। इस तरह की ठगी में अपराधी वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े एक मामले में स्वत: संज्ञान लिया था। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस तरह के अपराधों की स्थिति का आकलन करने और जरूरत पड़ने पर इसे अलग अपराध के तौर पर परिभाषित करने की दिशा में कदम उठाने को कहा था। अदालत ने नुकसान के अनुपात में उचित सजा तय करने पर भी विचार करने को कहा था।

CJI ने आर्थिक अपराधों और न्यायपालिका की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि PMLA जैसे कानून भी पूरी तरह अचूक नहीं हैं। कुछ मामलों में जांच एजेंसियों पर कानून के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। इनमें गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण नहीं बताना और जरूरत से ज्यादा समय तक हिरासत में रखना जैसी शिकायतें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका ने हस्तक्षेप कर लोगों को राहत दी है।

उन्होंने गिरफ्तारी के कारणों को लिखित रूप में बताने की जरूरत पर भी जोर दिया। CJI के मुताबिक, गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण केवल मौखिक रूप से बताना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल बनाम CBI मामले का जिक्र करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक मुकदमे से पहले हिरासत में रखना सजा का विकल्प नहीं बनना चाहिए।

सूर्यकांत ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में अवैध धन की बरामदगी को भी बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर साल बड़े पैमाने पर अवैध धन की मनी लॉन्ड्रिंग होती है, लेकिन इसकी तुलना में बहुत कम रकम ही वापस हासिल हो पाती है। ऐसे में अवैध संपत्ति और धन की पहचान कर उसे वापस लाना जांच एजेंसियों और न्याय व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है।

CJI ने करीब 2,300 साल पुराने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उदाहरण देते हुए भ्रष्टाचार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अर्थशास्त्र में सरकारी अधिकारियों द्वारा खजाने से धन निकालने के अलग-अलग तरीकों का उल्लेख मिलता है। कौटिल्य ने सरकारी धन के लालच की तुलना जीभ पर रखे शहद या जहर का स्वाद लेने से की थी।

उन्होंने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। CJI ने कहा कि आर्थिक अपराध और अवैध धन अक्सर एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहते। ऐसे मामलों में दूसरे देशों की एजेंसियों के साथ सहयोग जरूरी है। उन्होंने म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) को विदेशों में मौजूद अवैध संपत्ति और धन की पहचान करने तथा उसे वापस लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।