शैक्षणिक सत्र 2026- 27 से लागू होगी नई त्रि-भाषा नीति, अंग्रेजी ‘विदेशी’ श्रेणी में शामिल
New Delhi/AliveNews : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपनी शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का खाका तैयार कर लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब कक्षा 10वीं तक के छात्रों के लिए दो के बजाय तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। विशेष बात यह है कि नई व्यवस्था में अंग्रेजी को अब विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा गया है। इसका सीधा असर छात्रों के चयन पर पड़ेगा, क्योंकि बोर्ड के नए नियमों के अनुसार छात्र अब एक साथ अंग्रेजी और किसी अन्य विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) का चुनाव नहीं कर सकेंगे। उन्हें अंग्रेजी के साथ अनिवार्य रूप से दो भारतीय भाषाओं को चुनना होगा। यह नई त्रि-भाषा नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 में शुरू होगी और 2030- 31 तक चरणबद्ध तरीके से कक्षा 10 तक लागू कर दी जाएगी।
बोर्ड अध्यक्ष राहुल सिंह के अनुसार परीक्षा के पैटर्न में भी व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। साल 2027 की बोर्ड परीक्षा वर्तमान पाठ्यक्रम पर आधारित आखिरी परीक्षा होगी, जबकि 2031 से 10वीं की बोर्ड परीक्षा तीनों भाषाओं के लिए तीन अलग-अलग दिनों में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही गणित और विज्ञान जैसे विषयों में भी छात्रों को अब ‘एडवांस’ स्तर की परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा। सभी छात्रों के लिए 80 अंकों की सामान्य परीक्षा तो होगी ही, लेकिन जो छात्र अपनी दक्षता साबित करना चाहते हैं, वे 25 अंकों का एक अतिरिक्त ‘एडवांस’ पेपर भी दे सकेंगे। हालांकि, इस पेपर के अंक मुख्य परिणाम में नहीं जुड़ेंगे, लेकिन छात्र की मार्कशीट पर इसकी उपलब्धि का अलग से उल्लेख किया जाएगा।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सीबीएसई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसे आधुनिक विषयों को भी अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बना दिया है। वर्ष 2029 से इन विषयों की बोर्ड द्वारा बाहरी परीक्षा ली जाएगी। इसके अलावा, वोकेशनल एजुकेशन को भी 2027-28 के सत्र से एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि इन बदलावों से न केवल छात्रों में भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि बढ़ेगी, बल्कि वे तकनीक और व्यावसायिक कौशल में भी निपुण हो सकेंगे। विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों के लिए नियमों में थोड़ी ढील दी गई है, जहां दो के बजाय केवल एक भारतीय भाषा पढ़ना अनिवार्य होगा।
शिक्षा के स्तर को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सीबीएसई ने गणित और विज्ञान के मूल्यांकन में भी बड़ा बदलाव किया है। सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्र अब अपनी रुचि के अनुसार ‘स्टैंडर्ड’ या ‘एडवांस’ कोर्स चुन सकेंगे। इस व्यवस्था में सभी छात्र 80 अंकों की सामान्य परीक्षा में तो बैठेंगे ही, लेकिन विषय में गहरी पकड़ रखने वाले छात्र 25 अंकों का अतिरिक्त ‘एडवांस’ पेपर दे सकेंगे। यह एक घंटे का पेपर छात्र की उच्च-स्तरीय सोच और वैचारिक समझ का परीक्षण करेगा। राहत की बात यह है कि एडवांस पेपर के अंक कुल प्रतिशत (Aggregate) में नहीं जुड़ेंगे, बल्कि मार्कशीट में इसे एक अलग उपलब्धि के रूप में दर्शाया जाएगा। इसके लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा।
अधिकारियों के मुताबिक, गणित और विज्ञान का यह दो-स्तरीय मॉडल साल 2026-27 में कक्षा 9 से शुरू होगा, जिसके आधार पर इस बैच की पहली बोर्ड परीक्षा वर्ष 2028 में आयोजित की जाएगी। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों पर से परीक्षा का बोझ कम करना और उन्हें विषयों की गहन समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। इस नए करिकुलम के लागू होने से अब रटने के बजाय कौशल और समझ आधारित शिक्षा पर अधिक जोर रहेगा, जो छात्रों को भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभी से तैयार करेगा।

