August 25, 2026

मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ पर कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणी, कहा- ‘गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा’

Kolkata/Alive News: कलकत्ता हाई कोर्ट ने मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ के छह छंद गाना अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कहा कि “वंदे मातरम् गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा।”

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तापब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि देश में कई ईसाई स्कूल हैं, जहां सभी छात्र प्रार्थना में शामिल होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इससे किसी का धर्म बदल जाता है या कोई अपने धर्म से बाहर हो जाता है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने दलील दी कि केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन में वंदे मातरम् के सभी छह छंद गाना अनिवार्य किया गया है। उनका कहना था कि संविधान बनने के समय विचार-विमर्श के बाद केवल पहले दो छंद गाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से गीत गाना चाहे तो कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे सभी पर अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए।

भट्टाचार्य ने यह भी तर्क दिया कि ऐसा करने से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। उन्होंने अदालत से पूछा कि यदि कोई व्यक्ति गीत गाने से इनकार करे और उसके खिलाफ कार्रवाई हो, तो उसे कानूनी संरक्षण कैसे मिलेगा।

इस पर अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आदेश या कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिसमें वंदे मातरम् न गाने पर किसी के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाया गया हो। अदालत ने पूछा कि क्या अब तक किसी को इस कारण कोई नुकसान हुआ है।

वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज कुमार त्रिवेदी ने नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कई जनहित याचिकाएं केवल प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की जा रही हैं।

फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और अदालत ने अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।