June 6, 2026

सीएजी रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले

Delhi/Alive News: सीएजी यानी सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करने वाली संस्था की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कई मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में कमी की ओर भी इशारा किया गया है। यह भी बताया गया है कि काफी संख्या में सेना के जवानों को उनके वेतन-भत्ते समय पर और सही तरीके से नहीं मिले।

रिपोर्ट के मुताबिक सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से नहीं रखे गए। इससे काम की क्वालिटी और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हुआ। ऑडिट ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय साइट रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करे। ये वही कागज होते हैं जिनमें काम की प्रगति, मटेरियल और टेस्ट रिपोर्ट जैसी जानकारी रिकॉर्ड होती है।

रिपोर्ट में तीन प्रमुख हिस्सों की ऑडिट की गई…

  • पे एंड अकाउंट्स ऑफिस (PAOs) और प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (ऑफिसर्स) के कामकाज
  • मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) के कॉन्ट्रैक्ट्स में आंतरिक नियंत्रण और गुणवत्ता जांच
  • रक्षा मंत्रालय के तहत मिलिट्री अस्पतालों के प्रबंधन को शामिल किया गया है।

कई जवानों को समय पर भुगतान नहीं मिला

रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा तय समय पर नहीं हुई। इसके कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और दूसरे रैंक (ORs) के कर्मीयों से एक साथ बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल नहीं होने से कई सेना के जवानों को उनका भुगतान समय पर और सही तरीके से नहीं मिला।

PTO में देरी, सिस्टम आपस में ठीक से नहीं जुड़े

रिपोर्ट में PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) जारी करने में देरी की बात कही गई है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में डेटा सही से नहीं मिला, इसलिए कई आवेदन रिजेक्ट हो गए। ऑडिट ने कहा है कि अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर किया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जाए।

मिलिट्री अस्पतालों की इमारतें पुरानी, कई जगह जरूरी सुविधाएं नहीं

डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में कई दिक्कतें मिलीं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। एक मामले में जून 2022 में लैंसडाउन के एक मिलिट्री अस्पताल का हिस्सा गिर गया था। कई जगह HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम भी पूरे नहीं हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) मिलिट्री अस्पतालों की जरूरत की दवाएं पूरी नहीं दे पाए। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं को समय पर बदला नहीं गया, जिससे 13.52 करोड़ रुपये की दवाएं फंसी रहीं।