June 30, 2026

घर और अस्पताल के बीच संतुलन, मरीजों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहीं महिला डॉक्टर

Noida/Alive News: घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ मरीजों की सेवा का दायित्व निभा रहीं महिला डॉक्टर आज स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं। परिवार और पेशे के बीच संतुलन बनाते हुए वे न केवल बेहतर चिकित्सा सेवाएं दे रही हैं, बल्कि समाज में महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टरों के इसी समर्पण और योगदान को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) मनाया जाता है।

महिला डॉक्टरों का कहना है कि डॉक्टर का पेशा केवल नौकरी नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी का दूसरा नाम है। अस्पताल में मरीजों की देखभाल के साथ-साथ घर और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना चुनौतीपूर्ण जरूर होता है, लेकिन मरीजों के चेहरे पर मुस्कान और उनके स्वस्थ होने की खुशी हर कठिनाई को आसान बना देती है।

मेडिकल ऑफिसर (एनआरसी) डॉ. शालिनी ने बताया कि डॉक्टर बनने के बाद उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई। वह रोज सुबह जल्दी उठकर घर के जरूरी काम निपटाती हैं और इसके बाद अस्पताल पहुंचती हैं। अस्पताल में वह ओपीडी, वार्ड और  एनआरसी के साथ बच्चों की जांच और उपचार करती हैं। इसके अलावा इंटर्न डॉक्टरों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी देती हैं। उनका कहना है कि कई बार जरूरत पड़ने पर देर रात तक अस्पताल में रुकना पड़ता है, जिसे वह अपने पेशे की जिम्मेदारी मानती हैं। अस्पताल की ड्यूटी पूरी करने के बाद घर लौटकर वह परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं।

वहीं डॉ. रश्मि का कहना है कि हर दिन की शुरुआत परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों से होती है। इसके बाद अस्पताल पहुंचकर मरीजों की देखभाल उनकी पहली प्राथमिकता बन जाती है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों के कारण परिवार और बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पातीं, लेकिन डॉक्टर होने के नाते मरीजों की सेवा सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनका कहना है कि शुरुआत में घर और अस्पताल के बीच संतुलन बनाना कठिन था, लेकिन अब यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।