September 5, 2026

एआई समझाता है टॉपिक, लाइव टीचिंग समझाता है अनुभवों   

टीचर्स डे : टीचर-स्टूडेंट ने बताया एआई और लाइव टीचिंग का अंतर, बोले- पढ़ाई में एआई मददगार लेकिन टीचर की जगह लेना मुश्किल

Prabhjot Kaur /Alive News

Faridabad: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पढ़ाई को आसान और तेज जरूर बना दिया है, लेकिन क्या एआई कभी लाइव टीचिंग की जगह ले सकता है? टीचर्स डे के मौके पर टीचर और स्टूडेंट से जब एआई और लाइव टीचिंग के बीच अंतर को लेकर बात की गई तो सामने आया कि एआई पढ़ाई में मददगार टूल जरूर है, लेकिन टीचर का स्टूडेंट से सीधा संवाद, उसके हाव-भाव को समझना, उसकी परेशानी जानना और जरूरत के अनुसार पढ़ाने का तरीका बदलना एआई के लिए संभव नहीं है। 

डीएवी कॉलेज की टीचर अर्चना कसाना ने बताया कि  एआई  और टीचर के पढ़ाने के तरीके में काफी अंतर है। टीचर किसी टॉपिक को समझाने के लिए अपने अनुभव और रियल लाइफ एग्जामपल का इस्तेमाल करते हैं। इससे स्टूडेंट को विषय को समझने में आसानी होती है। वहीं एआई केवल दिए गए कमांड और उपलब्ध डेटा के आधार पर जवाब देता है। उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बाद स्टूडेंट के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले स्टूडेंट खुद नोट्स तैयार करते थे और लिखने में समय लगाते थे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि एआई कुछ ही सेकंड में नोट्स बनाकर दे देगा। इससे पहले जैसी गंभीरता और मेहनत कम हुई है। लाइव क्लास में टीचर स्टूडेंट के हाव-भाव देखकर समझ सकता है कि वह टॉपिक को समझ रहा है या नहीं। अगर किसी स्टूडेंट को पढ़ाई के अलावा कोई परेशानी है तो टीचर उससे बातचीत कर उसका समाधान निकालने में मदद कर सकता है। 

महिला कॉलेज के मीडिया विभाग की एचओडी शालिनी ने कहा कि एआई एक टूल और सिस्टम है, जबकि लाइव टीचिंग में टीचर और स्टूडेंट के बीच सीधा इंटरेक्शन होता है। टीचर स्टूडेंट के हाव-भाव देखकर उसकी परेशानी और समझ के स्तर को पहचान सकता है, लेकिन एआई ऐसा नहीं कर सकता। एआई से पढ़ने के बाद कई बार स्टूडेंट खुद सोचने के बजाय सीधे जवाब पाने का आदी हो जाता है। इससे उसकी स्वतंत्र सोच प्रभावित हो सकती है। पहले किसी सवाल को लेकर स्टूडेंट अपने दोस्तों और टीचर से चर्चा करते थे। 

वाईएससीए के मीडिया विभाग के एचओडी पवन सिंह ने कहा कि एआई सिर्फ एक टेक्नोलॉजी है, जबकि लाइव टीचिंग का इंपैक्ट हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, टीचर और स्टूडेंट के बीच होने वाली लाइव टीचिंग की अपनी अलग अहमियत है। उन्होंने कहा कि लाइव टीचिंग में भावनाएं होती हैं। टीचर स्टूडेंट के साथ बातचीत करता है, उसे मोटिवेट करता है और उसकी कमियों को पहचानकर सुधारने की कोशिश करता है। वहीं एआई एक एल्गोरिदम के आधार पर काम करता है और उसके पास मौजूद डेटा के अनुसार जानकारी देता है।

स्टूडेंट टीया ने कहा कि एआई कठिन टॉपिक को समझने, नोट्स तैयार करने और किसी भी विषय से जुड़ी जानकारी हासिल करने में काफी मदद करता है। इससे पढ़ाई आसान हो गई है और कम समय में किसी टॉपिक को समझना आसान हो जाता है। हालांकि, यह भी सही है कि एआई पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। 

वहीं स्टूडेंट दर्शन ने कहा कि एआई के जरिए किसी भी टॉपिक को कम समय में पढ़ना और समझना आसान हो गया है। पहले किसी किताब को पूरा पढ़ने या किसी विषय की जानकारी के लिए लाइब्रेरी जाना पड़ता था, लेकिन अब कई बार किताब की पूरी समरी चैटजीपीटी पर ही मिल जाती है। अब कुछ टीचर भी  एआई  का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार  एआई  की मदद से तैयार किए गए नोट्स स्टूडेंट को भेजे जाते हैं।