Prabhjot kour/Alive News
Faridabad: बीके अस्पताल में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मरीजों के लिए शुरू की गई है, लेकिन पांच रुपये के भुगतान का हिसाब रखना कर्मचारियों के लिए चुनौती बन गया है। हर ट्रांजेक्शन की जांच करने और उसकी आईडी रजिस्टर में दर्ज करने की प्रक्रिया से कर्मचारियों का काम बढ़ गया है। नेटवर्क की समस्या के कारण भुगतान में देरी होने से भी परेशानी आ रही है। ऐसे में कई कर्मचारी ऑनलाइन भुगतान के बजाय नकद पैसे लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अस्पताल में रोजाना करीब 3 से 4 हजार मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। यहां रजिस्ट्रेशन के लिए पांच रुपये शुल्क लिया जाता है। ओपीडी कर्मचारी बीजेंद्र के अनुसार, अधिकतर मरीज नकद भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच रुपये के प्रत्येक ऑनलाइन भुगतान का रिकॉर्ड रखना और उसका हिसाब मिलाना मुश्किल हो रहा है। इस वजह से ऑनलाइन भुगतान करने के इच्छुक कुछ मरीजों से भी नकद पैसे लिए जा रहे हैं।
हर ट्रांजेक्शन की आईडी करनी पड़ती है रजिस्टर में दर्ज
अस्पताल कर्मचारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि हर पैसे का ऑनलाइन भुगतान होने के बाद बार-बार ट्रांजेक्शन की जांच करनी पड़ती है। रिकॉर्ड के लिए प्रत्येक भुगतान की आईडी रजिस्टर में लिखनी होती है। इससे नियमित काम के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। नेटवर्क की समस्या होने पर भुगतान की पुष्टि में भी समय लगता है।
इमरजेंसी में शाम और रात को ज्यादा ऑनलाइन भुगतान
इमरजेंसी के रूम नंबर-40 में तैनात कर्मचारी के अनुसार, सुबह की तुलना में शाम और रात के समय ऑनलाइन ट्रांजेक्शन अधिक होती हैं। हर दिन 30 से 40 लोग यहां ऑनलाइन भुगतान करते है। ऐसे में मरीजों के भुगतान का रिकॉर्ड रखने के साथ इमरजेंसी से जुड़ा नियमित काम भी संभालना पड़ता है। कर्मचारियों के सामने चुनौती यह है कि ऑनलाइन भुगतान का हिसाब भी सही रहे और मरीजों को समय पर सेवा भी मिल सके।
क्या कहना है अधिकारी का
ऑनलाइन भुगतान का रिकॉर्ड रखना जरूरी है। हर ट्रांजेक्शन की आईडी रजिस्टर में दर्ज की जाती है, ताकि भुगतान का पूरा हिसाब रखा जा सके। शुरुआत में कर्मचारियों को थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसकी आदत हो जाएगी।
– विकास गोयल, कार्यकारी पीएमओ बीके अस्पताल।

