Chandigarh/Alive News: हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है। हड़ताल के पहले दिन प्रदेश के 15 जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। कई इलाकों में रात से बिजली गुल रहने के कारण लोगों को पानी की किल्लत और रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ा। फरीदाबाद और करनाल में बिजली कटौती से परेशान लोगों ने सड़क जाम कर दिया, जबकि भिवानी में ट्रांसफॉर्मर पर फेज बदलने चढ़े एक किसान की करंट लगने से मौत हो गई।
बिजली कर्मचारी 22 से 24 अक्टूबर तक गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि इस लाइसेंस को रद्द किया जाए। उनका कहना है कि इससे सरकारी बिजली निगमों की आय और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
फरीदाबाद में लोगों ने किया रोड जाम
फरीदाबाद के एनआईटी-2 में लखानी धर्मशाला के पास बिजली आपूर्ति बाधित होने से परेशान लोगों ने बिजली विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दिया। लोगों का कहना था कि बिजली नहीं आने से घरों में पानी तक नहीं बचा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया और जाम खुलवाया। शहर के कई सेक्टरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आईं।
भिवानी में किसान की करंट लगने से मौत
भिवानी के सुरपुरा कलां गांव में गुरुवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ट्रांसफॉर्मर पर फेज बदलने चढ़े 50 वर्षीय किसान बलवान की करंट लगने से मौत हो गई। वह कासनी खुर्द गांव के निवासी थे। बिजली निगम के एसडीओ के अनुसार, खेत में सिंगल फेज को थ्री फेज में बदलने के दौरान हादसा हुआ। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
गुरुग्राम समेत कई जिलों में बिजली संकट
गुरुग्राम के करीब 12 गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए। अंबाला कैंट, जींद, झज्जर, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और सिरसा के कई इलाकों में भी बिजली कटौती की शिकायतें सामने आईं। बिजली न होने से पानी की आपूर्ति, कारोबार और मंडियों के कामकाज पर असर पड़ा। कई बिजलीघरों पर पुलिस तैनात की गई है और प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में जुटा है।
मुख्यमंत्री ने की हड़ताल वापस लेने की अपील
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण में मजबूती से पक्ष रखेगी। उन्होंने कर्मचारियों को अपनी पसंद के वकील से पैरवी कराने का विकल्प देने और उसका खर्च सरकार द्वारा उठाने की बात भी कही।
उधर, बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का कहना है कि जब तक निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस वापस नहीं लिया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा। हड़ताल के बीच बिजली आपूर्ति सामान्य करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

