October 16, 2026

किडनी के मरीजों में पोटैशियम बढ़ने से दिल की धड़कन पर पड़ सकता है असर

Faridabad/Alive News: किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ सकता है। इससे दिल की धड़कन अनियमित होने और गंभीर मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है। ऐसे में किडनी के मरीजों को खानपान और दवाइयों के सेवन में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एकॉर्ड अस्पताल में किडनी की सेहत और पोटैशियम के संतुलन को लेकर आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी।

अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के साथ पोटैशियम जैसे खनिजों का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर में पोटैशियम जमा हो सकता है। उन्होंने कहा कि लौकी के जूस और घीया के पानी सहित पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए। खानपान का चयन किडनी की स्थिति और खून में पोटैशियम के स्तर को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

आधुनिक दवाओं से इलाज में मदद

डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि खून में पोटैशियम का स्तर नियंत्रित करने के लिए अब पहले की तुलना में बेहतर उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। सोडियम जिरकोनियम साइक्लोसिलिकेट ऐसी ही एक दवा है, जिसका इस्तेमाल पोटैशियम का स्तर कम करने के लिए किया जाता है। हालांकि, इसका सेवन चिकित्सक की सलाह और निगरानी में ही करना चाहिए। उन्होंने मरीजों को नियमित जांच कराने और बिना सलाह दवाएं या घरेलू पेय लेने से बचने की सलाह दी।

दिल पर पड़ने वाले असर की दी जानकारी

अस्पताल के चेयरमैन डॉ. युवराज कुमार ने कहा कि मरीजों को बेहतर उपचार देने के साथ बीमारियों के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. ऋषि गुप्ता ने पोटैशियम के असंतुलन का दिल पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. वीके उपाध्याय, डॉ. वैशाली कथूरिया और डॉ. आनंद ठाकुर ने भी अपने विचार रखे।