September 17, 2026

मणिपुर में हिंसा से जनजीवन प्रभावित, 7 दिन से स्कूल-बाजार बंद: चीनी ₹450 किलो तक पहुंची, 4 दिन में 6 लोगों की हत्या का आरोप

मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में हिंसा और नाकेबंदी के बीच प्रभावित जनजीवन

Manipur/Alive News: मणिपुर में कुकी और नगा समुदायों के बीच तनाव के चलते पहाड़ी इलाकों में जनजीवन प्रभावित है। कई जगहों पर पिछले 7 दिनों से स्कूल और बाजार बंद हैं। सड़कों और हाईवे पर नाकेबंदी के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। जरूरी सामान की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। कांगपोकपी के कुछ गांवों में चीनी की कीमत 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, डर के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। खेतों में जाना और मेडिकल इमरजेंसी में अस्पताल या एयरपोर्ट पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

इधर, पिछले 4 दिनों में 4 महिलाओं समेत 6 कुकी लोगों की हत्या का आरोप लगाया गया है। कुकी संगठनों ने इन घटनाओं के लिए नगा समुदाय को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी में शुरू हुए ताजा संघर्ष के बाद इस साल अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है।

सड़कों पर नाकेबंदी, आवाजाही में परेशानी

मणिपुर के उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग और चंदेल जिले नगा बहुल हैं। वहीं, चूराचांदपुर, कांगपोकपी और फिरजॉल में कुकी समुदाय की आबादी अधिक है। कांगपोकपी समेत कुछ जिलों में दोनों समुदायों के लोग रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे और प्रमुख सड़कों पर कई जगह नाकेबंदी की गई है। रास्तों पर चेक पॉइंट भी बनाए गए हैं। ऐसे में बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट के निजी वाहनों से यात्रा करना मुश्किल हो गया है।

चीनी 450 रुपये किलो तक बिक रही

कांगपोकपी की 53 वर्षीय मार्गरेट के मुताबिक, जिला मुख्यालय में होने के कारण उन्हें किसी तरह जरूरी सामान मिल रहा है, लेकिन गांवों में हालात ज्यादा खराब हैं। कुछ गांवों में चीनी 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।

35 वर्षीय डेविड ने बताया कि डर के कारण लोग खेतों में भी नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें आशंका है कि कहीं से भी अचानक गोलीबारी शुरू हो सकती है। उनके मुताबिक, मेडिकल इमरजेंसी में अस्पताल जाने या एयरपोर्ट पहुंचने के लिए भी कुछ जगहों पर नगा समुदाय के सब-डिविजनल ऑफिसर से मंजूरी लेनी पड़ रही है।

चावांगकिनिंग गांव में घरों में आगजनी और फायरिंग

बुधवार को कांगपोकपी जिले के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में कई घरों में आग लगाए जाने की घटना सामने आई। कुछ घरों की दीवारों पर गोलियों के निशान भी मिले हैं। इससे पहले मंगलवार रात करीब 10:30 बजे संदिग्ध हथियारबंद लोगों ने चावांगकिनिंग नागा गांव पर हमला किया था। अधिकारियों के मुताबिक, आधुनिक हथियारों से लैस लोगों ने गांव में फायरिंग की।

पास में तैनात CRPF जवानों ने जवाबी कार्रवाई की। करीब 6 घंटे तक रुक-रुककर गोलीबारी होती रही। अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब 4:30 बजे तक फायरिंग जारी रही। इस दौरान गांव के बाहरी हिस्से में बने दो लकड़ी के घर जला दिए गए। CRPF जवानों ने हमलावरों को गांव में घुसने से रोक दिया।

लीसांगफाई में दो कुकी महिलाओं की हत्या

तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में मंगलवार को दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद कई फार्महाउसों में आग लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई।

एक कुकी विधायक ने दोनों महिलाओं की हत्या की निंदा की। उन्होंने इस वारदात में NSCN-IM और ZUF-K कैडर के शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मणिपुर में 2023 से जारी है हिंसा

मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 3 मई 2023 को हिंसा शुरू हुई थी। इसके बाद राज्य में लंबे समय तक तनाव बना रहा। इस दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए। बीच-बीच में गोलीबारी, आगजनी और झड़पों की घटनाएं सामने आती रही हैं।

इस साल फरवरी में उखरुल के लिटन गांव से कुकी और नगा समुदायों के बीच नया तनाव शुरू हुआ। इसके बाद पहाड़ी इलाकों में हिंसा की घटनाएं बढ़ने लगीं।सितंबर में तामेंगलोंग और कांगपोकपी में हत्या, गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी से अब तक इस संघर्ष में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है।