Faridabad/Alive News: पेशाब की धार कमजोर होना, बार-बार टॉयलेट जाना या पेशाब के दौरान जलन, अगर आप इन परेशानियों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। लंबे समय तक बने रहने वाले ऐसे लक्षण पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। प्रोस्टेट कैंसर को भले ही उम्रदराज पुरुषों की बीमारी माना जाता रहा हो, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार कम उम्र में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में पेशाब संबंधी लगातार हो रही परेशानी को उम्र या सामान्य कमजोरी मानकर टालना भारी पड़ सकता है।
मैरिंगो एशिया अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के क्लिनिकल डायरेक्टर एवं हेड यूरोलॉजी, यूरो-ऑन्कोलॉजी डॉ. रितेश मोंगा के अनुसार प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती चरण में कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के भी रह सकता है। बीमारी बढ़ने पर पेशाब करने में परेशानी, पेशाब की धार कमजोर होना, बार-बार पेशाब आना और पेशाब के दौरान दर्द या जलन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो खुद से दवा लेने या उन्हें सामान्य मानकर टालने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
देर से पता चला तो हड्डियों तक पहुंच सकता है कैंसर
उन्होंने कहा कि प्रोस्टेट कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में इसके संकेत हमेशा स्पष्ट नहीं होते। बीमारी बढ़ने पर यह आसपास के ऊतकों के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकती है। अगर कैंसर हड्डियों तक पहुंच जाए तो कमर, कूल्हे या दूसरी हड्डियों में लगातार और तेज दर्द की समस्या हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार बीमारी की समय पर पहचान होने पर उपचार के विकल्प अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
कैंसर से लड़ाई में प्रजनन क्षमता की चिंता भी
युवाओं के लिए प्रोस्टेट कैंसर का एक और महत्वपूर्ण पहलू उपचार के बाद यौन एवं प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाला संभावित प्रभाव है। डॉ. मोंगा के अनुसार कुछ मरीजों में हार्मोन थेरेपी के कारण टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है, जिससे यौन इच्छा और इरेक्शन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं सर्जरी और रेडिएशन का भी प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसलिए जिन मरीजों की भविष्य में संतान की योजना है, उन्हें इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर से संभावित दुष्प्रभावों और फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन जैसे विकल्पों पर चर्चा करनी चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें
डॉ. रितेश मोंगा के अनुसार धूम्रपान से दूरी, संतुलित आहार, हरी सब्जियों और फलों का सेवन, नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना लाभकारी है। रेड मीट का अत्यधिक सेवन सीमित करना चाहिए। परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास या पेशाब संबंधी लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर उचित जांच कराना जरूरी है।

