Faridabad/Alive News: बच्चे का पेट भर गया, इसका मतलब यह नहीं कि उसे पूरा पोषण भी मिल गया। आज बच्चों की प्लेट में खाना तो है, लेकिन उसमें जरूरी प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की जगह कई बार चिप्स, बिस्कुट, पैकेट वाले स्नैक्स और मीठे पेय (स्वाद के लिए अलग से चीनी मिलाने वाले पदार्थ) ज्यादा जगह बना लेते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर विशेषज्ञों ने अभिभावकों को याद दिलाया है कि बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए पेट भरना नहीं, पोषक तत्वों से भरपूर खाना जरूरी है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात वाजपई के अनुसार, बचपन में सही पोषण न मिलने का असर बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक विकास और मानसिक क्षमता पर पड़ सकता है।
छह महीने तक मां का दूध सबसे अहम
उन्होंने कहा कि जन्म के बाद पहले छह महीने तक शिशु के लिए मां का दूध सर्वोत्तम आहार है। इसके बाद बच्चे की उम्र और जरूरत के हिसाब से पूरक आहार शुरू करना चाहिए। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा हो, उसकी प्लेट में अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए।
कम वजन और बार-बार बीमारी को न करें नजरअंदाज
वही यदि बच्चे का वजन लगातार कम हो रहा है, कमजोरी रहती है, भूख नहीं लगती, वह बार-बार बीमार पड़ता है या उम्र के हिसाब से उसका विकास नहीं हो रहा है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञों का संदेश साफ है बच्चों के लिए महंगा खाना नहीं, सही खाना जरूरी है। राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का असली मकसद तभी पूरा होगा, जब पोषण की बात सिर्फ स्कूलों और जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि हर घर की रोज की थाली में दिखाई दे।

