New Delhi/Alive News: दिल्ली के 86 साल पुराने रेस क्लब को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने एस्टेट ऑफिसर की ओर से जारी बेदखली के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि क्लब को अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने के पर्याप्त मौके दिए गए थे, लेकिन क्लब ने इन मौकों का इस्तेमाल नहीं किया।
क्लब ने दावा किया था कि उसे केंद्र सरकार की याचिका की कॉपी नहीं दी गई और उसे जवाब दाखिल करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत के जिला एवं सत्र न्यायाधीश पितांबर दत्त ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि एस्टेट ऑफिसर ने क्लब को केंद्र सरकार की याचिका की कॉपी दी थी। जवाब और सबूत पेश करने के लिए भी पर्याप्त समय दिया गया था।
अदालत ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 के आदेश में भी साफ लिखा था कि याचिका की कॉपी क्लब को दी जा चुकी है। इस आदेश पर क्लब के सचिव और कानूनी प्रतिनिधि कर्नल एसके बख्शी के हस्ताक्षर भी थे।
इसके बाद किसी सुनवाई में क्लब ने यह शिकायत नहीं की कि उसे याचिका की कॉपी नहीं मिली है। ऐसे में अदालत ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन की दलील को स्वीकार नहीं किया।
मार्च में ही दिया गया था जमीन खाली करने का नोटिस
केंद्र सरकार ने पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट की धारा 5 के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले क्लब को 12 मार्च 2026 को नोटिस दिया था। इसमें क्लब को 15 दिन के भीतर जमीन खाली कर पूरे परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस को सौंपने के लिए कहा गया था।
नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई थी कि ऐसा नहीं करने पर कानून के तहत बेदखली और जमीन का कब्जा वापस लेने की कार्रवाई की जाएगी।क्लब ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने शुरुआत में क्लब को अंतरिम राहत दी थी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा था कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना क्लब को बेदखल नहीं किया जाएगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल 2026 को क्लब का मुकदमा निपटा दिया।
इसके बाद केंद्र सरकार ने एस्टेट ऑफिसर के सामने याचिका दाखिल की और क्लब को कारण बताओ नोटिस दिया। अदालत के मुताबिक, नोटिस मिलने के बावजूद क्लब ने न तो इस कार्रवाई का विरोध किया और न ही अपना जवाब दाखिल किया।
लीज खत्म होने के बाद किराया देना पर्याप्त नहीं
क्लब ने यह भी दलील दी कि वह लगातार किराया चुका रहा है, इसलिए उसे अनधिकृत कब्जेदार नहीं माना जा सकता। इस पर अदालत ने कहा कि 1994 के बाद केंद्र सरकार की ओर से लीज बढ़ाने या उसका नवीनीकरण करने का कोई दस्तावेज सामने नहीं आया है। सिर्फ लीज की अवधि खत्म होने के बाद किराया देते रहने से लीज अपने आप नवीनीकृत नहीं हो जाती। अदालत ने यह भी कहा कि क्लब ऐसा कोई मजबूत प्रथम दृष्टया आधार नहीं दिखा पाया, जिसके आधार पर 11 अगस्त 2026 के बेदखली आदेश पर रोक लगाई जा सके।
अदालत ने क्लब की अंतरिम राहत की याचिका खारिज कर दी है। अब इस मामले में मुख्य अपील पर 26 सितंबर 2026 को सुनवाई होगी।

