July 2, 2026

बेंगलुरु डे-केयर में 3 साल की बच्ची से क्रूरता, टॉयलेट जेट से मुंह पर पानी डाला; वॉशिंग मशीन में बैठाया

Bengaluru/Alive News: बेंगलुरु में Capgemini के HAL कैंपस में चल रहे डे-केयर सेंटर से बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है। वायरल वीडियो में 2 से 3 साल की बच्ची के साथ महिला स्टाफ द्वारा अमानवीय व्यवहार करते हुए देखा गया।

वीडियो में बच्ची टॉयलेट के अंदर फर्श पर लेटी हुई जोर-जोर से रोती नजर आ रही है। एक महिला उसका वीडियो बना रही है, जबकि दूसरे वीडियो में बच्ची को टॉयलेट सीट पर बैठाकर उसके मुंह पर जेट स्प्रे से पानी डाला जा रहा है।

एक अन्य वीडियो में बच्ची को फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीन के ड्रम में बैठाया गया, जहां उसे डराया जाता दिख रहा है। बच्ची लगातार रो रही थी। बताया जा रहा है कि ये वीडियो 29 जून को वायरल हुए, जिसके बाद मामला सामने आया।

मामले की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने 5 महिला केयरगिवर्स के खिलाफ केस दर्ज किया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कितने बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार हुआ।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डे-केयर सेंटर में आने वाले बच्चे कैंपस में काम करने वाले कर्मचारियों के थे, जिन्हें उनके माता-पिता ड्यूटी के दौरान यहां छोड़ते थे। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और अधिकारियों में गहरा आक्रोश है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि डे-केयर सेंटर का संचालन सीधे कैपजेमिनी कर रही थी या किसी बाहरी एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। पांचों महिला कर्मचारियों से पूछताछ जारी है। अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच पूरी होने तक बेंगलुरु स्थित ऑन-कैंपस डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

डे-केयर सेंटर छोटे बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और शुरुआती सीखने की गतिविधियों के लिए बनाए जाते हैं। खासकर बड़े शहरों में कामकाजी माता-पिता अपने बच्चों को निर्धारित समय के लिए ऐसे सेंटर में छोड़ते हैं। इस घटना ने डे-केयर सेंटरों की सुरक्षा और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगर डे-केयर में बच्चे के साथ गलत व्यवहार हो तो क्या करें?
माता-पिता तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही बाल कल्याण समिति या स्थानीय बाल सुरक्षा अधिकारी को सूचित करें। जरूरत पड़ने पर बच्चे की मेडिकल जांच कराएं और कानूनी सलाह लें।