Faridabad/Alive News: जिले में रसोई और कमर्शियल गैस की कमी ने आम जीवन की रफ्तार को प्रभावित कर दिया है। गैस सिलेंडर की किल्लत के चलते अब घरों से लेकर छोटे कारोबार तक पारंपरिक ईंधनों लकड़ी और कोयले की ओर लौटने को मजबूर हैं। इस बदलाव ने न सिर्फ लोगों की दिनचर्या बदली है, बल्कि खर्च भी बढ़ा दिया है।
गैस उपलब्ध न होने के कारण कई परिवार अब मिट्टी के चूल्हों पर खाना बनाने लगे हैं। खासतौर पर वे परिवार ज्यादा प्रभावित हैं, जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं है और जो पहले महंगे दाम पर भी सिलेंडर खरीद लेते थे। अब सिलेंडर की अनुपलब्धता ने उनके सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
दूसरी ओर, लकड़ी और कोयले की मांग अचानक बढ़ने से इनके दाम भी चढ़ गए हैं। जो लकड़ी पहले 10 रुपये प्रति किलोग्राम मिलती थी, वह अब 13 से 18 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। मजबूरी में लोग महंगे दाम पर भी इसे खरीदने को विवश हैं।
इस संकट का असर छोटे व्यापारियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। होटल, ढाबे और फास्ट फूड विक्रेता अब कोयले की भट्टी का सहारा ले रहे हैं। कई दुकानदारों ने गैस के अभाव में अपने काम को जारी रखने के लिए पारंपरिक तरीकों को अपनाया है।
सेक्टर-23 के फास्ट फूड विक्रेता गोविंद का कहना है कि दुकान बंद करने के बजाय उन्होंने कोयले की भट्टी लगाना बेहतर समझा। उनके अनुसार, “स्थिति सामान्य होने पर फिर से कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग शुरू करेंगे।”
गैस संकट ने यह साफ कर दिया है कि आपूर्ति में थोड़ी सी बाधा भी आम जनजीवन और छोटे व्यवसायों पर गहरा असर डाल सकती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्थिति कब सामान्य होगी और लोग फिर से आधुनिक सुविधाओं की ओर लौट पाएंगे।

