Faridabad/Alive News: अरावली जंगल क्षेत्र में जंगली जानवरों की वास्तविक संख्या को लेकर वन विभाग के पास पुख्ता आंकड़े मौजूद नहीं हैं। इसकी मुख्य वजह वर्ष 2017 के बाद से किसी विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे का न होना है। विभाग के पास यह स्पष्ट जानकारी भी नहीं है कि पिछले वर्षों में जंगल क्षेत्र कम होने और कमर्शियल गतिविधियों में बदलाव के बाद वन्यजीवों की संख्या कितनी बढ़ी या घटी है।
अनुमान के आधार पर बढ़ोतरी का दावा
अधिकारियों का कहना है कि जंगल और आसपास के इलाकों में कभी-कभार जंगली जानवरों का दिखाई देना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसी आधार पर वन्यजीवों की संख्या बढ़ने का अनुमान लगाया जाता है, हालांकि इसके समर्थन में आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।
पुराने तरीके से हुआ था पहला सर्वे
वर्ष 2012 में किए गए सर्वे में कर्मचारियों ने पैदल चलकर पंजों के निशानों के आधार पर जानवरों की गिनती की थी। यह पारंपरिक तरीका सटीक नहीं माना जाता। उस समय अरावली क्षेत्र में 8 तेंदुए दर्ज किए गए थे। इसके अलावा लोमड़ी, लकड़बग्घा और नीलगाय सहित अन्य वन्यजीवों की भी गणना की गई थी।
कैमरा ट्रैप में बढ़ी संख्या
इसके बाद 2017 में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून को वैज्ञानिक सर्वे का जिम्मा दिया गया। अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए कैमरों से प्राप्त रिपोर्ट में 31 तेंदुए, 167 नीलगाय, 14 चिंकारा और 23 मोर सहित कई अन्य वन्यजीव दर्ज किए गए।
2021 की रिपोर्ट अब तक जारी नहीं
2017 के बाद एक और सर्वे कराया गया, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार संस्थान को कई बार पत्र लिखे गए, पर जवाब नहीं मिला। अब उच्च अधिकारियों से नए सर्वे की मांग की गई है।
दशकों बाद दिखा चीतल
21 अगस्त को अनखीर और बड़खल क्षेत्र के पास एक जर्जर फार्महाउस के नजदीक चीतल दिखाई दिया, जिसे वर्षों बाद देखा गया माना जा रहा है। गुरुग्राम और पाली रोड पर भी जंगली जानवरों के दिखने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई बार वे पानी और भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं।
वन विभाग का मानना है कि क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सटीक आंकड़ों के अभाव में पूरा आकलन फिलहाल अनुमान पर ही आधारित है।

