Faridabad/Alive News: कहते हैं कि यदि सपनों को सच्ची लगन और मेहनत का साथ मिल जाए तो मंज़िल दूर नहीं रहती। इसी कहावत को सच कर दिखाया है राजस्थान निवासी राजू ने, जो पिछले 25 वर्षों से विभिन्न वेशभूषा धारण कर लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर रहे हैं। इन दिनों वे 39 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में ‘चार्ली चैपलिन’ का रूप धारण कर दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं और साथ ही उन्हें इस महान कॉमेडियन के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं।
राजू ने बताया कि उनका एक समूह है, जिसे ‘महमूद ग्रुप’ के नाम से जाना जाता है। इस चार सदस्यीय समूह में कलाकार रावण, जिंद और डाकू जैसे विभिन्न किरदारों की वेशभूषा धारण करते हैं। मेले में राजू ‘चार्ली चैपलिन’ बनकर बच्चों और बड़ों को अपनी अदाओं से आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन अलग-अलग किरदार निभाते हैं, जिनमें बंदर, लोहार-लोहारी और गुजर-गुजरी प्रमुख हैं। हालांकि, उनका सबसे पसंदीदा किरदार रावण, डाकू और क्रूर सिंह का है।
राजू ने ‘चार्ली चैपलिन’ के बारे में बताते हुए कहा कि वे पुराने दौर के प्रसिद्ध कॉमेडियन थे, जो बिना कुछ बोले केवल हाव-भाव और अभिनय से लोगों को हंसाते थे। उनके इसी अंदाज ने दुनिया भर में उन्हें पहचान दिलाई। राजू भी उसी शैली में अभिनय कर दर्शकों का मनोरंजन करते हैं।
चार्ली चैपलिन की वेशभूषा धारण करने में उन्हें करीब एक से डेढ़ घंटा लग जाता है। चेहरे पर विशेष रंग लगाने के कारण कई बार उन्हें परेशानी भी होती है। उन्होंने बताया कि सर्दियों में तो यह ठीक रहता है, लेकिन गर्मियों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे पूरे दिन लोगों का मनोरंजन करने में जुटे रहते हैं। मेले में बच्चे और बड़े उनके साथ फोटो खिंचवाने को उत्साहित नजर आते हैं।
राजू ने बताया कि पारिवारिक आर्थिक कठिनाइयों के चलते उन्हें इस पेशे को अपनाना पड़ा और आज उनकी आजीविका पूरी तरह इसी कला पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि यह कला उनके परिवार में राजघराने के समय से चली आ रही है। सूरजकुंड मेले के बाद यदि उन्हें अन्य स्थानों से आमंत्रण मिलता है तो वे कार्यक्रम प्रस्तुत करने जाएंगे, अन्यथा अपने घर लौट जाएंगे।
अंत में उन्होंने सरकार से अपील की कि उनकी इस लोककला को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि पारंपरिक वेशभूषा और अभिनय की यह कला जीवित रह सके और उन्हें अधिक अवसर मिले।

