June 14, 2026

सहकारिता आंदोलन से लेकर डिप्टी सीएम तक कौन थे अजित पवार

Delhi/Alive News: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत हो गई। उनके साथ तीन अन्य लोग भी इस हादसे में मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार सुबह पुणे जिले में विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और तीन अन्य लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि यह घटना तब हुई जब पवार का विमान पुणे के बारामती इलाके में उतर रहा था।

अजित पवार महाराष्ट्र की सत्ता में एक ऐसा नाम रहे हैं जिसने बीते एक दशक में राज्य की राजनीति को नया आकार दिया था। राजनीतिक माहौल उन्हें विरासत में मिला, लेकिन पहचान उन्होंने अपने दम पर बनाई। राजनीति में आने से पहले वे लंबे समय तक सहकारिता आंदोलन से जुड़े रहे, जो महाराष्ट्र की राजनीति की रीढ़ माना जाता है।

कौन थे अजित पवार?

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार के भतीजे हैं। साल 1991 में अजित पवार पहली बार बारामती से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

गौरतलब है कि अजित ने 23 साल की उम्र में ही राजनीति में एंट्री ले ली थी। इस उम्र में ही वे कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में सदस्य बन गए थे। 1991 में वे पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने। फिर 16 सालों तक इस पद पर खुद ही बैठे रहे। इसी साल उन्होंने पहली बार संसदीय चुनाव भी जीता था। 

बारामती से राजनीति के फलक तक का सफर

साल 1995 में वे बारामती सीट से विधानसभा चुनाव जीते। फिर बारामती सीट को उन्होंने अपना अभेद्य किला बना लिया, जहां से उन्हें हर बार जनता का भरोसा मिला। इस सीट से उन्होंने 7 बार चुनाव जीता। यही सीट उन्हें राज्य स्तर की राजनीति में मजबूती से स्थापित करती चली गई और इसी इलाके में उनका प्लेन क्रैश हुआ।

अजित पवार पहली बार 2010 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे अलग-अलग सरकारों में इस पद पर कई बार रहे। उपमुख्यमंत्री रहते हुए उनके पास वित्त, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे।

इन विभागों के जरिए वे राज्य के प्रशासनिक फैसलों में सीधे तौर पर शामिल रहे। खासकर सिंचाई परियोजनाओं और बजट से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका प्रमुख रही।

जिस चाचा ने राजनीति सिखाई उन्हीं से मतभेद, फिर चुना अलग रास्ता

अजित पवार शरद पवार को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। यानी उन्हें राजनीति की ट्रेनिंग घर से ही मिली थी। चाचा-भतीजे के इस जोड़ी से महाराष्ट्र में लंबे समय तक राजनीतिक जादू किया। शरद पवार ने अजित पवार को सत्ता साधने के सारे गुर सिखा दिए थे। इसके साथ ही काडर में अनुशासन और जनाधार को अपनी ओर करना की कला भी अजित पवार ने शरद पवार से ही सिखी थी।

अजित पवार एनसीपी में अपने तेज और रणनीतिक फैसले के लिए जाने जाते थे। एक वक्त पर ऐसा कहा भी जाता था कि यदि शरद पवार पार्टी की आत्मा हैं तो अजित पवार उसकी काया।

हालांकि वक्त के साथ अजित और शरद पवार की सोच में फर्फ आने लगा। इस वजह से अजित ने चाचा का साथ छोड़ अलग लीक चुनी जो शुरुआत में काफी जोखिम भरा कदम लगा लेकिन अजित पवार की प्रबंधन कला और पार्टी नेताओं में उनकी पकड़ ने उनका साथ दिया।