March 7, 2026

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न: नई परिभाषा पर रोक, खनन पर यथास्थिति बरकरार

Delhi/Alive News: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला से जुड़ी अपनी “नई परिभाषा” वाले पुराने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की गंभीर चिंताओं को देखते हुए कोर्ट ने माना कि इस परिभाषा से अरावली के बड़े हिस्से में खनन का रास्ता खुल सकता था, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होने का खतरा था।

दिसंबर 2025 में दिए ताज़ा आदेश में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.जी. मसीह ने 20 नवंबर 2025 के फैसले को स्थगित (Abeyance) कर दिया। उस आदेश में अरावली की ऊंचाई के आधार पर नई परिभाषा को स्वीकार किया गया था।

कोर्ट ने अब अरावली क्षेत्र की स्थिति की दोबारा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय समीक्षा के लिए एक नई विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह समिति अरावली की ऊंचाई, पारिस्थितिकी और खनन की अनुमति से जुड़े पहलुओं की गहराई से जांच करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की नई माइनिंग लीज जारी नहीं की जाएगी। यानी फिलहाल अरावली में खनन पर रोक पहले की तरह जारी रहेगी।

इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि अरावली पर्वतमाला उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन, भूजल संरक्षण और प्रदूषण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।