Faridabad/Alive News: दिसंबर आते ही हर किसी पर क्रिसमस का खुमार चढ़ने लगता है। यह पूरे साल सबसे बड़ा त्योहार है जो यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। प्रत्येक चर्च में यह दिन बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह बात एनआईटी 5 नंबर रेलवे रोड स्थित शांति निवास चर्च के फादर सचिन कुमार ने कही।

फादर सचिन कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह दिन उनके लिए साल का सबसे बड़ा दिन होता है जिसे क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार के लिए चर्च में 1 दिसंबर से ही तैयारी शुरू हो जाती हैं। चर्च को लाइट, रंग- बिरंगी झालरों और रिबन से सजाया जा रहा है साथ ही सफाई भी की जा रही है। लोगों की चर्च के अंदर बैठने के लिए भी उचित व्यवस्था की जा रही है। इस साल उनके मसीह लोग घर – घर जाकर यीशु मसीह के विचारों का प्रचार करेंगे कि हमें हमेशा शांति और एकता के साथ रहना चाहिए और अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना चाहिए और हर साल मुख्य अतिथि यीशु मसीह होते है।

उन्होंने बताया कि शांति निवास पिछले सत्तावन सालों से रेनोवेट नहीं हुआ था और इस साल इसे रेनोवेट किया गया है तो चर्च में लोगों द्वारा बढ़-चढ़कर क्रिसमस मनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दिसंबर शुरू होते ही हर रविवार को ढाई सौ से तीन सौ लोग चर्च में आकर इबादत करते हैं जो फरीदाबाद ही नहीं बल्कि दूर-दूर के इलाकों से आते हैं। 25 दिसंबर को ईसाई धर्म के साथ अन्य धर्म के लोग भी चर्च में आते हैं और यीशु मसीह के समक्ष इबादत करते हैं। लोगों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन और चर्च के कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई जाएगी ताकि कोई अनहोनी न हो।

25 दिसंबर को इबादत का समय
24 दिसंबर की मध्यरात्रि को 11 बजे से ही चर्च को इबादत के लिए खोल दिया जाएगा और रात एक बजे इबादत की जाएगी। सुबह दस बजे तक मुख्य इबादत की जाएगी और चर्च रात दस बजे तक खुला रहेगा।
क्यों मनाया जाता है क्रिसमस
क्रिसमस ईसाई धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन ईसा मसीह (यीशु मसीह) के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है। ईसाई मान्यताओं के अनुसार यीशु मसीह का जन्म मानवता को प्रेम, करुणा, क्षमा और सेवा का संदेश देने के लिए हुआ था।

