March 7, 2026

क्यों मनाई जाती है सफला एकादशी, क्या है शुभ मुहूर्त जानिए ?

Faridabad/Alive News: पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। इस साल सफला एकादशी आज यानी 15 दिसंबर को है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके जीवन के रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं और हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। इसी कारण इस एकादशी का नाम सफला एकादशी पड़ा है। पुराणों और शास्त्रों में सफला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से पापों का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। जो लोग लंबे समय से परेशानी, रुकावट या असफलता से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह एकादशी बहुत फल देने वाली मानी जाती है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अन्न का त्याग करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और अंत में बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

सफला एकादशी पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें साथ ही हाथ में अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़कें। जिसके बाद भगवान श्री विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, चंदन, धूप, दीप, फल, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करें। एकादशी के दिन भगवान विष्णु को 21 तुलसी दल जरूर चढ़ाएं। तुलसी के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। घी का दीपक जलाएं और तुलसी माला से 108 बार मंत्र जप करें जिसके बाद विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु की आरती करें। 

शुभ मुहूर्त 

एकादशी तिथि प्रारंभ – 14 दिसंबर 2025 को शाम  06 बजकर 49 बजे 

एकादशी तिथि की समाप्त – 15 दिसंबर 2025 को रात 09 बजकर 19 बजे 

पारण ( व्रत तोड़ने का समय ) – 16 दिसंबर को सुबह 07 बजकर 07 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक

सफला एकादशी उपाय

सफला एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और मन से प्रार्थना करें। इस दिन झूठ, गुस्सा और गलत बोल से बचें तथा अन्न का त्याग करें या हल्का फलाहार लें। 108 बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। शाम को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें, घर में शांति बनाए रखें और जरूरतमंद को दान दें।