March 8, 2026

शादी के सीजन में हाई-डेसीबल बेस-म्यूजिक: दिल और कान के मरीजों के लिए बढ़ रहा गंभीर खतरा

Prabhjot Kaur/Alive News

Faridabad: शादी का सीजन हो या किसी पार्टी की महफिल अक्सर देखा जाता है कि लोग तेज बीट पर डीजे और पावरफुल स्पीकर बजाकर दिल के मरीजों के लिए खतरा बन रहे हैं। शादी और पार्टी की महफिल सजाने वालों लोगों के लिए ये भले ही मनोरंजन का हिस्सा हो । लेकिन यह मनोरंजन बहुत से लोगों के लिए जान का खतरा साबित हो रहा है। इसको लेकर कानून ने पार्टी और महफिलों में तेज संगीत बजाने का समय और 

पावरफुल स्पीकर की तेज बीट की डेसिबल निर्धारित की हुई है। लेकिन लोग सभी कानूनों को ताक पर रखकर देर रात तक तेज आवाज में शादी पार्टी करते रहते है।  इसकी वजह से बुजुर्ग, पढने वाले छात्रों के अलावा सामान्य लोगों भी परेशान होते है। कई बार देखा जाता है की तेज साउंड की वजह से विवाद भी पैदा हो जाते है। लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है और न ही ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है।                       

ये है तेज साउंड बजाने के नियम

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के तहत सामान्य आवासीय क्षेत्रों के लिए अनुमति-प्राप्त दिन/रात्रि सीमा निर्धारित है दिन में लगभग 55 dB और रात में 45 dB और रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर/पब्लिक एड्रेस के उपयोग पर पाबंदी का प्रावधान है। हालांकि, इन्हें आयोजन स्थलों पर नियमों की व्याख्या व लागू करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। रात 10 बजे के बाद तेज संगीत पूरी तरह प्रतिबंधित है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में ध्वनि का स्तर 75 dB से अधिक नहीं होना चाहिए। नियम तोड़ने पर शिकायत पर तुरंत पुलिस कार्रवाई और जुर्माना तय है।

क्या है विशेषज्ञों की राय    

डॉक्टरों के अनुसार, तेज और लगातार बजने वाला बेस-म्यूजिक दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है और स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ जाता है। लगातार उच्च डेसिबल पर संगीत सुनने से सुनने का शक्ति की क्षति भी हो सकती है। शादी-समारोहों के कारण बार-बार पड़ोसियों की नींद बुरी तरह प्रभावित होती है, अस्पताल और मेडिकल सेंटरों के पास यह और भी गंभीर समस्या बन जाती है। कई आवासीय संघों (RWA) ने 10 बजे के बाद शोर-शराबा रोकने के लिए नियम बनाए हैं, पर उनका पालन नहीं होता है। स्थानीय प्रशासन व पुलिस से अनुमति लेने की प्रक्रिया मौजूद हैं, लेकिन अक्सर व्यवधान, राजनीतिक संरक्षण या निगरानी की कमी के कारण नियम कमजोर पड़ते हैं।

क्या कहना है लोगों का
“हमारे इलाके में हर दूसरे दिन शादी होती है। रात 12–1 बजे तक ढोल-डीजे की आवाज सहनी पड़ती है। बच्चों और बुजुर्गों की नींद तक खराब हो जाती है। बच्चों की नींद पूरी न होने की वजह से अगले दिन वह स्कूल जाने में देरी हो जाती हैं।”

-सीमा शर्मा, स्थानीय निवासी

“तेज बेस की धक-धक से मुझे बेचैनी होती है और दिल की धड़कन बढ़ने लगती है। डॉक्टर ने साफ कहा है कि ऐसे माहौल से दूरी रखनी चाहिए, पर देर रात तक हाई बेस पर म्यूजिक बजता है। अगर आवाज कम करने को बोलो तो लोग लड़ाई पर उतर जाते है।

-राजेश मल्होत्रा, हार्ट पेशेंट

“हमें लोग खुद बोलते हैं कि आवाज और तेज नहीं करेंगे पर लोग मानते ही नहीं। पुलिस जब तक नोटिस न दे, कोई नहीं मानता। हम नियम के हिसाब से बजाना चाहते हैं, पर आयोजक नहीं मानते। हम समय का भी ध्यान रखते है लेकिन आयोजक पैसे न देने का दबाव बना कर देर तक डीजे बजाने के लिए बाध्य करते है। ”

-अरविंद, डीजे ऑपरेटर

“शादी में म्यूजिक तो चाहिए ही, लेकिन इतना तेज भी नहीं कि कोई बीमार पड़ जाए। हमने कई बार खुद पुलिस को फोन किया है, लेकिन उनकी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होती। अगर सेट लिमिट का सब पालन करें, तो सबके लिए सही रहेगा।”

-रीना वत्स, कॉलेज स्टूडेंट

प्रशासन को सख्ती से निगरानी करनी चाहिए ताकि न सिर्फ लोगों की नींद बल्कि उनकी सेहत भी सुरक्षित रह सके। साथ ही आयोजकों को भी समझना होगा कि मनोरंजन से बढ़कर किसी की जान कीमती है। अगर, नियम और कानून बने है तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह उनका पूर्ण रूप से पालन करवाए। 

-खुशी, कॉलेज स्टूडेंट