Faridabad/Alive News: अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण एवं रजत पदक जीतने वाले बधिर वर्ग के खिलाड़ियों ने हरियाणा की खेल नीति में उसके साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उनका कहना है कि संशोधित नीति में बधिर खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किया गया है, क्योंकि उन्हें समान उपलब्धियों के बावजूद पैरा खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम नकद पुरस्कार दिया जाता है।
आज यह मामला “वीरेंद्र सिंह एवं अन्य बनाम भारत संघ” शीर्षक से माननीय न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध हुआ। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अजय वर्मा ने दलील देते हुए कहा यह नीति विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 तथा सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित निर्णयों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि बधिर खिलाड़ी भी पैरा-खेल प्रतियोगिताओं के समान स्तर और कठिनाई वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में देश का नाम रोशन करते हैं, लेकिन वर्तमान हरियाणा की खेल नीति उन्हें समान मौद्रिक मान्यता से वंचित करती है, जिससे उनकी गरिमा और योगदान को ठेस पहुंच रही है।
माननीय उच्च न्यायालय ने सुनवाई के उपरांत भारत सरकार को नोटिस जारी किया और मांगा जवाब
याचिकाकर्ताओं ने निम्न निर्देश देने का आग्रह करते हुए कहा कि 1 फरवरी 2025 की अधिसूचना में निहित भेदभावपूर्ण प्रावधानों को निरस्त किया जाए, बधिर खिलाड़ियों और पैरा खिलाड़ियों के बीच समान उपलब्धियों पर नकद पुरस्कार में समानता प्रदान की जाए। पात्र बधिर खिलाड़ियों को टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के लाभ दिए जाएं, ताकि उन्हें निष्पक्ष प्रशिक्षण और तैयारी का सहयोग मिल सके। बधिर खिलाड़ियों को भारत के खेल ढांचे में समान दर्जा प्रदान किया जाए तथा सभी सरकारी प्रोत्साहन एवं सहायता योजनाओं में शामिल किया जाए।
अधिवक्ता अजय वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि माननीय न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2025 को होगी।

