March 7, 2026

गुरु पूर्णिमा: गुरु के प्रति आभार जताने का दिन

गुरु पूर्णिमा का दिन हमारे जीवन में बहुत खास होता है। यह दिन उन गुरुओं को समर्पित है जो हमें अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के उजाले की ओर ले जाते हैं। यह पर्व हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और भारतीय संस्कृति की एक सुंदर परंपरा को दर्शाता है।

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।”
अर्थात गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और शिव हैं – वे ही परम सत्य हैं, जिन्हें हम नमन करते हैं।

गुरु का मतलब है “गु” यानी अंधकार और “रु” यानी प्रकाश। जो हमें अंधकार से निकालकर रोशनी की ओर ले जाए, वही सच्चा गुरु होता है। हमारे जीवन में जो भी ज्ञान और संस्कार हैं, उनका श्रेय हमारे गुरुओं को जाता है  चाहे वे हमारे माता-पिता हों, स्कूल के शिक्षक हों, या कोई भी मार्गदर्शक।

गुरु पूर्णिमा हमें सिखाती है कि किताबों से मिले ज्ञान के साथ-साथ जीवन में अच्छे मूल्य, अनुशासन और संस्कार भी ज़रूरी हैं जो हमें गुरु ही सिखाते हैं। इस दिन हम अपने सभी शिक्षकों और मार्गदर्शकों का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने हमें सिर्फ पढ़ाया ही नहीं, बल्कि जीवन की सही दिशा भी दिखाई।

गुरु पूर्णिमा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक भावना है  अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता की भावना।

“माटी रख चाक पर, घड़ा बनाएं कुम्हार।
श्रेष्ठ गुरु मिल जाए तो, शिष्य पाएं संस्कार।”

“जिसने दिया हमें ज्ञान का प्रकाश,
ऐसे गुरु को हम सबका शत-शत प्रणाम।”

-लेखक: मोनिका गर्ग, अध्यापक- ब्ल्यू बर्ड स्कूल।