March 7, 2026

डूबते शहरों अब दावों के सहारे

Faridabad/Alive News: इस बार मानसुन आया तो शहर डूबेगा नहीं, इन दिनों सरकार की ओर से इसका आश्वासन दिया गया है। लेकिन पब्लिक सब जानती है। उसे सब पता है कि यह राजनीतिक बयानबाजी है। यह सही है, कि वर्तसान सरकार अपने पूर्ववर्तियों के कारण बिगड़ी स्थितियों को सुधारने कि दिशा में कुछ उपाय कर रही है। पर दिल्ली में मर्ज का इलाका इतना आसान नही है। यहां का ड्रेनेज सिस्टम अब से पांच साल पहले का बना हुआ है। तब से अब तक दिल्ली की आबादी तीन – चार गुना बढ़ चुकी है। अब इसमें ड्रेनेज सिस्टम का क्या दोष है। दिल्ली का एकग बड़ा हिस्सा अनियोजित भी है और इन क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम भी नहीं है।

नालों और जल निकासी के अन्य मार्गों पर अतिक्रमण से भी जलभराव होता है। जहां अन्य शहरों में लोग मानसून का बेसब्री से इंतजार करते हैं और इसके आने पर झूमते हैं। वहीं राष्ट्रीय राजधानी के लोग डरते हैं कि बारिश आई तो पानी से लवालव भरी सड़कों पर वाहन खींचना पड़ेगा। शहर की ये पीड़ा और उसके कष्ट की वे अवधारणा यूं ही नहीं बनी है। दिल्ली हर साल डूबती है क्योंकि जब तक नया ड्रेनेज मास्टर प्लान नहीं होगा. तब तक हालात ठीक नहीं होंगे। लेकिन, इस पर सिर्फ मानसून आने के समय ही चर्चा और चिता होती है। अब सवाल यही है कि आखिर शहरवासियों को जलभराव जैसे हालात के डर से कैसे निकाला जाए? अब तक नया ड्रेनेज मास्टर प्लान क्यों नहीं बन पाया? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? ड्रेनेज व्यवस्था कई सरकारी एजेंसियों के जिम्मे क्यों रहे, इसे सिंगल विंडो सिस्टम की तरह क्यों नहीं किया जा सकता?