October 13, 2026

नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना, पूजा से मिलता है सकारात्मक ऊर्जा का संदेश

मां के स्वरूप की पूजा से दूर होता है भय, श्रद्धालु करते हैं सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना

Faridabad/Alive News: नवरात्र में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है। मां का यह स्वरूप ऊर्जा, सृजन और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन मां की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं।

मां कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा जैसे अस्त्र-शस्त्र तथा वस्तुएं सुशोभित हैं। उनके आठ भुजाओं वाले स्वरूप के कारण उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां की आराधना से जीवन में उत्साह, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संचार होता है।

पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्र के चौथे दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर मां की पूजा की जाती है। भक्त मां को फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं। मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाने की भी परंपरा है। हालांकि, भोग में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सामग्री अर्पित की जा सकती है। पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ और मां के मंत्रों का जाप भी किया जाता है।

सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक

मां कूष्मांडा की आराधना का संदेश जीवन में आशा और सकारात्मकता बनाए रखना है। जिस तरह धार्मिक मान्यताओं में मां को सृष्टि की रचनाकार माना गया है, उसी तरह भक्त भी उनके पूजन के साथ अपने जीवन में नई शुरुआत, आत्मविश्वास और बेहतर सोच का संकल्प लेते हैं। नवरात्र का यह दिन श्रद्धालुओं को आस्था के साथ अपने कर्तव्यों और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को निभाने की प्रेरणा देता है।