September 21, 2026

बच्चों पर पढ़ाई और स्क्रीन का दबाव, कम उम्र में भूलने की शिकायत बढ़ी

Faridabad/Alive News: होमवर्क पूरा करने की चिंता, परीक्षा का दबाव, घंटों मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन और देर रात तक जागने की आदत बच्चों और युवाओं की दिनचर्या में ये चीजें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर केवल उनकी पढ़ाई या मूड पर ही नहीं, बल्कि याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर भी लगतार पड़ रहा है। कई बच्चों और युवाओं में छोटी-छोटी बातें भूलने, पढ़ी हुई चीजें याद न रहने और काम के बीच ध्यान भटकने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। जो कि अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारी के कारण हो रहा है। विश्व अल्जाइमर दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बच्चों की नींद, स्क्रीन टाइम, शारीरिक गतिविधि और मानसिक तनाव पर नजर रखने की सलाह दी है।

ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एकॉर्ड अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता के अनुसार अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है और इसका जोखिम उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है। हालांकि 65 वर्ष से कम उम्र में भी अल्जाइमर या डिमेंशिया की शुरुआत हो रही है, जिसे यंगर-ऑनसेट अल्जाइमर या डिमेंशिया कहा जाता है। इस संबंध में अस्पताल में रोज 25 से 30 मरीज आ रहे है जो इस डिमेंशिया से ग्रस्त है। आजकल यह बीमारी बच्चों से लेकर 40 वर्ष के लोगों में ज्यादा देखने को मिल रही है। इसलिए लगातार बढ़ती भूलने की समस्या, परिचित लोगों के नाम याद न रहना, सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना और रोजमर्रा के कामों में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मैरेंगो एशिया हॉस्पिटल, फरीदाबाद की डायरेक्टर एवं एचओडी, न्यूरोलॉजी विभाग डॉ. सुषमा शर्मा के अनुसार जब भूलने की समस्या लगातार बढ़ने लगे और रोजमर्रा के काम, व्यवहार या निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार चीजें भूलना, सामान रखकर उसकी जगह याद न रहना या सही शब्द न मिलना हमेशा उम्र का सामान्य असर नहीं होता। अल्जाइमर एक प्रगतिशील बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। उम्र इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक है । बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम, कम शारीरिक गतिविधि और खराब नींद को सीधे अल्जाइमर का कारण नहीं माना जाता, लेकिन ये मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित कर सकते हैं। शुरुआती लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है।

इन संकेतों पर रखें नजर: बार-बार बताई गई बात भूल जाना, पढ़ी हुई चीज को जल्दी भूल जाना, सामान रखकर उसकी जगह याद न रहना या एक ही सवाल बार-बार पूछना याददाश्त में बदलाव के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा परिचित रास्ते या जगह को पहचानने में परेशानी, पढ़ाई या काम के दौरान लगातार ध्यान भटकना और रोजमर्रा के सामान्य काम करने में असामान्य कठिनाई भी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें या धीरे-धीरे बढ़ते जाएं तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

केस स्टडी-1: 18 वर्षीय बच्चे ने खेल के मैदान की जगह मोबाइल को दे दी ली

स्कूल की पढ़ाई और ऑनलाइन क्लास के चलते एक 18 वर्षीय बच्चे का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ता गया। क्लास खत्म होने के बाद भी वह मोबाइल पर वीडियो और गेम देखने में समय बिताता था और देर रात तक फोन इस्तेमाल करता था। धीरे-धीरे उसकी नींद का समय कम होने लगा और सुबह उठने में परेशानी होने लगी। पढ़ाई के दौरान उसका ध्यान भटकने लगा और वह पढ़ी हुई चीजें जल्दी भूलने की शिकायत करने लगा। परिजन भी बच्चे को बाहर खेलने भेजने के बजाय कई बार मोबाइल हाथ में थमा देते थे। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल, कम शारीरिक गतिविधि और खराब नींद संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।