June 6, 2026

पाकिस्तान की जनता सप्ताह में 4 दिन आधा पेट और 2 दिन भूखे पेट गुजरने को मजबूर

New Delhi/Alive News: खाड़ी देशों पर Iran की लगातार बम्बारी से खत्म हो चुकी ईधन की सप्लाई चेन की वजह से पाकिस्तान में ऐसे हालात हैं कि वहां की सरकार और जनता सप्ताह में 4 दिन आधा पेट और 2 दिन भूखे पेट गुजरने को मजबूर है, और ऐसे में UAE ने दबाव बना दिया है कि उसके द्वारा पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर को वापस करो, और अभी वापस करो…

जिसके बाद पाकिस्तान का UAE को कर्ज लौटाना ‘आत्मघाती’ मजबूरी बन चुका है : भूख से बिलखती पाकिस्तान की जनता की रोटी बनाम आतंकवादी गतिविधियों पर खर्च किए गए कर्ज को चुकाने के लिए और कर्ज लेना पाकिस्तान की पहचान बन चुकी है…

क्या पाकिस्तान का वजूद सिर्फ कर्ज लेने और उसे चुकाने के लिए एक ‘नया कर्ज’ ढूंढने तक सिमट गया है? खाड़ी के युद्ध ने पाकिस्तान की ‘भीख मांगने वाली कूटनीति’ की भी कमर तोड़ दी है। यूएई को अपने बचाव के लिए पैसा चाहिए, और पाकिस्तान के पास देने के लिए सिर्फ अपनी जनता के हक की रोटी है।

ईरान, अमेरिका और इजरायल के त्रिकोणीय युद्ध ने खाड़ी के देशों में कोहराम मचा रखा है. तेल और गैस की सप्लाई लाइनें कट चुकी हैं, मिसाइलों और ड्रोनों के साये में यूएई (UAE) और सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। लेकिन इस महायुद्ध के बीच सबसे बड़ा झटका लगा है ‘दुनिया के इकलौते परमाणु शक्ति संपन्न भिखारी’ पाकिस्तान को!

यूएई ने दोस्ती के सारे नकाब उतार दिए हैं और पाकिस्तान की गर्दन पकड़ कर साफ कह दिया है— “पैसे निकालो, और अभी निकालो!”

दुनिया हैरान है कि जिस पाकिस्तान के पास अपने मुल्क को खिलाने के लिए आटा नहीं है, वो इस महीने के अंत तक 2 अरब डॉलर का कर्ज कैसे चुकाएगा?

पाकिस्तान की जनता आज 480 रुपये प्रति लीटर से भी महंगा पेट्रोल खरीदने को मजबूर है। यह दुनिया के सबसे महंगे तेलों में से एक है, जो जनता की नसों से खून चूसने के बराबर है।
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार वेंटिलेटर पर है। कर्ज चुकाने का मतलब है—मुल्क के खजाने में बचा-कुचा आखिरी सिक्का भी बाहर चला जाना।

“शहबाज शरीफ की सरकार ने दंभ तो भर दिया है कि हम कर्ज चुकाएंगे, लेकिन क्या उन्होंने अपनी आवाम के चेहरे देखे हैं? पाकिस्तान आज उस दोराहे पर खड़ा है जहां एक तरफ ‘कर्ज की किश्त’ है और दूसरी तरफ ‘भूखी नंगी आवाम की लाशें’।

जब मुल्क की मां अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी को तरस रही हों, जब बिजली के बिल आम आदमी की पूरी महीने की कमाई को लील रहे हों, तब 2 अरब डॉलर यूएई की तिजोरी में डालना किसी आर्थिक आत्महत्या से कम नहीं है. पाकिस्तान कर्ज तो चुका देगा, लेकिन क्या वो अपने मुल्क के अंदर सुलग रही विद्रोह की आग को बुझा पाएगा?”