Faridabad/Alive News: सरकार ने पंचायत की जमीन पर वर्ष 2004 से पहले किए गए अवैध निर्माण को नियमित (रेगुलर) करने की योजना शुरू की है। इसके तहत कब्जाधारकों को अपनी अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन का कानूनी मालिक बनने का अवसर दिया गया है। इच्छुक आवेदक 15 जनवरी तक संबंधित विभाग में आवेदन जमा कर सकते हैं।
गांवों में बड़ी संख्या में लोगों ने पंचायत की जमीन पर घर बना रखे हैं, जिन पर लंबे समय से प्रशासन और पंचायत विभाग की ओर से कार्रवाई का खतरा बना रहता है। सरकार की इस योजना से ऐसे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह योजना गांव के रास्तों और तालाबों की जमीन पर किए गए अवैध निर्माण पर लागू नहीं होगी।
योजना के तहत आवेदनकर्ता को यह प्रमाणित करना होगा कि उसने वर्ष 2004 से पहले निर्माण किया था। इसके लिए 2004 से पहले का बिजली बिल या उस समय लगे बिजली मीटर से संबंधित दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, यह भी बताना होगा कि संबंधित भूमि के कम से कम 75 प्रतिशत हिस्से पर निर्माण किया गया है।
इसके अलावा पंचायत और ग्राम सभा का प्रस्ताव भी आवेदन के साथ लगाना होगा, जिसमें यह पुष्टि हो कि निर्माण 2004 से पहले किया गया था। आवेदक को 2004 के समय का कलेक्टर रेट और वर्तमान कलेक्टर रेट से संबंधित जानकारी भी देनी होगी।
सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन 2004 से पहले की सैटेलाइट तस्वीरों और गांव के नक्शों से किया जाएगा। सत्यापन के बाद कब्जाधारक को 2004 के सर्कल रेट का डेढ़ गुना भुगतान करना होगा, जिसके बाद उसे जमीन का कानूनी मालिकाना हक प्रदान कर दिया जाएगा।
जमीन मालिकाना हक योजना के तहत सरकार का उद्देश्य पंचायत भूमि पर वर्षों से रह रहे लोगों को कानूनी सुरक्षा देना है। प्रशासन ने पात्र लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी फाइलें तैयार कर ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारी के कार्यालय में जमा करें।
पंचायत भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर सरकार की बड़ी योजना

