September 27, 2026

सरस मेले में कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान बना पश्मीना शॉल

Faridabad/Alive News: सेक्टर-12 स्थित एचएसवीपी ग्राउंड में आयोजित सरस मेले में कश्मीर से आए प्योर पश्मीना शॉल लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेले में कश्मीर के नदीम वानी द्वारा लगाए गए स्टॉल नंबर 018 पर जीआई टैग के साथ प्योर पश्मीना शॉल, स्टोल और अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इनकी कीमत 500 रुपये से शुरू होकर 10 लाख रुपये तक बताई गई है।

स्टॉल के मालिक नदीम वानी ने बताया कि पश्मीना शॉल बनाना उनका पुश्तैनी काम है। कश्मीर में उनकी हैंडलूम वानी पश्मीना आर्ट गैलरी वर्ष 1965 से इस क्षेत्र में काम कर रहीं है। उन्होंने बताया कि पश्मीना शॉल पूरी तरह हाथ से बनाई जाती हैं, जिनमें नीडल वर्क और हैंडवर्क किया जाता है। सरस मेले में उनके स्टॉल पर फिलहाल सबसे महंगी शॉल 4500 रुपये की है, जो सुंदर नीडल वर्क से तैयार की गई है।

नदीम वानी ने बताया कि पश्मीना शॉल महंगी होने का सबसे बड़ा कारण इसकी कच्ची सामग्री और बनाने की प्रक्रिया है। प्यो र पश्मीना ऊन चांगथांगी बकरी से प्राप्त होती है, जो बेहद ठंडे इलाकों में पाई जाती है। इस ऊन को इकट्ठा करने से लेकर धागा बनाने और फिर शॉल बुनने तक की पूरी प्रक्रिया बहुत मेहनत और समय लेने वाली होती है। एक शॉल को तैयार करने में कई हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।

उन्होंने बताया कि पश्मीना सिर्फ एक शॉल नहीं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान है। सदियों से पश्मीना शॉल कश्मीर की परंपरा, कला और कारीगरों की मेहनत का प्रतीक रही है। शादी-ब्याह, खास अवसरों और सम्मान के रूप में पश्मीना शॉल देने की परंपरा आज भी कश्मीर में जीवित है।

सरस मेले में कश्मीरी पश्मीना शॉल न केवल लोगों को अपनी खूबसूरती और नर्मी से आकर्षित कर रही हैं, बल्कि कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तकला को भी देशभर के लोगों तक पहुंचा रही हैं।