मज़हब, मानवता और वैचारिक संघर्ष का विमर्श: ‘मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना’
भारतीय समाज में धर्म, मज़हब और मानवता के संबंधों को लेकर सदियों से विचार-विमर्श चलता रहा है, किंतु समकालीन समय में यह बहस और अधिक तीव्र और प्रासंगिक हो गई है। इसी संवेदनशील और जटिल विषय को केंद्र में रखकर लेखक डॉ. राकेश कुमार आर्य की पुस्तक ‘मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना’ एक वैचारिक हस्तक्षेप […]

